पितृपक्ष में हरिद्वार का ये मंदिर है बहुत खास, जानें गया जैसे ही क्यों है इसका महत्व

Narayani Shila Temple:  वैसे तो पितृ पक्ष में कहीं भी श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुराणों में भी ऐसा उल्लेख मिलता है.

पितृपक्ष में हरिद्वार का ये मंदिर है बहुत खास, जानें गया जैसे ही क्यों है इसका महत्व
नारायणी शिला मंदिर पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

हरिद्वार, नरेश गुप्ता: पितृपक्ष (Pitru Paksha) आज (14 सितंबर) से शुरू हो रहे हैं. पितृपक्ष पूर्णिमा के साथ शुरू होकर 16 दिनों के बाद सर्व पितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा है. बिहार के गया को सबसे बड़ा पितृ तीर्थ माना जाता है. क्या आप भी इस पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए जाने का प्लान बना रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है. अगर आपके पास समय कम है और कम खर्च में आप अपने पितरों को मोझ दिलवाना चाहते हैं, तो हरिद्वार (Haridwar) स्थित नारायणी शिला मंदिर (Narayani Shila Temple) में ये कर सकते हैं.

दुनियाभर से आते हैं श्रद्धालु
हरिद्वार स्थित नारायणी शिला मंदिर पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुराणों में भी ऐसा उल्लेख मिलता है. पितृ पक्ष के दौरान  दुनिया भर से श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है. लोग यहां आकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं. पितृ पक्ष में की जाने वाली पूजा के लिए गया मंदिर के बाद हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर का विशेष स्थान है. 

पुराणों में भी है उल्लेख
यही वजह से इस मंदिर का बहुत महत्व है. हरिद्वार में गंगा नदी में स्नान के बाद लोग के नारायणी शिला मंदिर और कुशा घाट पर जाकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं. वैसे तो पितृ पक्ष में कहीं भी श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पुराणों में भी ऐसा उल्लेख मिलता है.

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क्यों हैं इतना महत्व
नारायणी शिला मंदिर के बारे में कहा जाता है कि एक बार जब गया सुर नाम का राक्षस देवलोक से भगवान विष्णु यानि नारायण का श्रीविग्रह लेकर भागा तो भागते हुए नारायण के विग्रह का धड़ यानि मस्तक वाला हिस्सा श्रीबद्रीनाथ धाम के बह्मकपाली नाम के स्थान पर गिरा. उनके हृदय वाले कंठ से नाभि तक का हिस्सा हरिद्वार के नारायणी मंदिर में गिरा और चरण गया में गिरे, जहां नारायण के चरणों में गिरकर ही गयासुर की मौत हो गई. यानि वही उसको मोक्ष प्राप्त हुआ था. स्कंध पुराण के केदार खण्ड के अनुसार, हरिद्वार में नारायण का साक्षात हृदय स्थान होने के कारण इसका महत्व अधिक इसलिए माना जाता है, क्योंकि मां लक्ष्मी उनके हृदय में निवास करती है. इसलिए इस स्थान पर श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना जाता है.