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पितृ पक्ष 2019: तृतीया की श्राद्ध आज, जानें घर पर कैसे करें पितरों की पूजा

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष (Pitru Paksha 2019) कहते हैं. इस दौरान जिस तिथि में पूर्वजों या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होती है, उसी तिथि को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है.

पितृ पक्ष 2019: तृतीया की श्राद्ध आज, जानें घर पर कैसे करें पितरों की पूजा
पूर्णिमा से अमावस्या की बीच में आने वाली सभी तिथियों में लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं.

नई दिल्लीः भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष (Pitru Paksha 2019) कहते हैं. इस दौरान जिस तिथि में पूर्वजों या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होती है, उसी तिथि को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है. इन 16 दिनों के दौरान हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनके नाम पर दान कर तर्पण दे हैं और उनका श्राद्ध करते है. श्राद्ध संबंधित शास्त्र पद्म पुराण, लिंग पुराण, मत्स्य पुराण और अग्नि पुराण में कहा गया है कि जब कभी जिस भी व्यक्ति की मृत्यु तृतीय तिथि (शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष) के दिन होती है, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है.

श्राद्ध के लिए सामग्री:
कुशा, कुशा का आसन, काली तिल, गंगा जल, जनैऊ, तांबे का बर्तन, जौ, सुपारी और कच्चा दूध.

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श्राद्ध पक्ष पूजा विधि-
सबसे पहले स्वयं को पवित्र करें, जिसके लिए खुद पर गंगा जल छिड़कें. उसके बाद कुशा को अनामिका में बांधें और जनेऊ पहनें. तांबे के बर्तन में फूल, कच्चा दूध, जल ले कर अपना आसान पश्चिम में रखें और कुशा का मुख पूर्व दिशा में रखें. हाथों में चावल एवं सुपारी लेकर भगवान का मनन करें और उनका आव्हान करें. दक्षिण दिशा में मुख कर पितरों का आव्हान करें, इसके लिए हाथ में काली तिल रखें. अपने गोत्र का उच्चारण करें, साथ ही जिसके लिए श्राद्ध विधि कर रहे हैं उनके गोत्र और नाम का उच्चारण करें और तीन बार तर्पण विधि पूरी करें. अगर पितरों का नाम न पता हो तो भगवान का नाम लेकर भी तर्पण विधि कर सकते हैं.

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तर्पण के बाद धूप डालने के लिए कंडा लें, उसमें गुड़ और घी डालें. बनाये गए भोजन का एक भाग धूप में दें उसके आलावा एक भाग गाय, कुत्ते, कौए, पीपल और देवताओं के लिए निकालें. इस तरह भोजन की आहुति के साथ विधि पूरी की जाती है.

तिथि याद न होने पर अमावस्या को करें श्राद्ध
परिवार के किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि आपको याद नहीं है, तो भी आप श्राद्ध कर सकते हैं. ऐसा स्थिती में सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है. सर्वपितृ अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है.