सर्व पितृ के साथ ही आज शनिश्चरी अमावस्या भी, 20 सालों बाद बन रहा है ऐसा संयोग

 मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के तर्पण के लिए त्रिवेणी घाट पहुंचते हैं, जहां वह जूते-चप्पल छोड़ कर जाने की अनोखी परंपरा का पालन करते हैं.

सर्व पितृ के साथ ही आज शनिश्चरी अमावस्या भी, 20 सालों बाद बन रहा है ऐसा संयोग

नई दिल्लीः इस बार श्राद्ध 28 सितंबर (शनिवार) को समाप्त हो रहे हैं. ऐसे में सर्व पितृ और शनिश्चरी अमावस्या साथ-साथ पड़ रहे हैं. ऐसा संयोग 20 सालों बाद बन रहा है, जब सर्व पितृ और शनिचरी अमवस्या एक ही दिन पड़ रहे हैं. इससे पहले यह संयोग 1999 में पड़ा था. शास्त्रों के मुताबिक, सर्व पितृ अपने पितरों को तर्पण देने का आखिरी दिन होता है और शनिश्चरी अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या के इस खास संयोग में पितरों को विदाई देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

ऐसे में मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के तर्पण के लिए त्रिवेणी घाट पहुंचते हैं, जहां वह जूते-चप्पल छोड़ कर जाने की अनोखी परंपरा का पालन करते हैं. श्रद्धालुओं के छोड़े इन जूते-चप्पलों की प्रशासन नीलामी करता है. ऐसे में आज शनिश्चरी और सर्वपितृ अमवस्या एक साथ होने पर देर रात से ही दूर-दूर से आए श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर पुण्य कमाते हैं. 

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श्रद्धालु सुबह से ही लंबी-लंबी लाईनों में लग कर स्नान कर शनि मंदिर के दर्शन कर रहे हैं. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दान पूण्य किया. उज्जैन 20 सालों बाद सर्व पितृ अमावस्या और शनिचरी अमावस्या पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उज्जैन के इस प्राचीन शनि मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ते दिखाई दिए. उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने मंदिर की स्थापना की थी. यह देश का पहला ऐसा मंदिर भी है जहां शिव के रूप में शनि की पूजा की जाती है और लोग मनोकामना कर शनि कृपा पाने के लिए तेल चढ़ाते हैं.

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लोगों ने रात 12 बजे बाद से ही फव्वारों में स्नान भी शुरू कर दिया, लेकिन मुख्य स्नान सुबह सूर्योदय के बाद अमावस्या पर्व काल में ही किया गया. प्रशासन ने रात से ही उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी थी. सीसीटीवी कैमरे की मदद से निगरानी की जा रही थी. नदी में जल भराव होने के कारण श्रधालुओं को नदी में नहीं जाने दिया गया इसलिए बेरिकेड्स से होकर फव्वारों में स्नान करवाया गया. 

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मान्यता है की आज के दिन शनि के दर्शन मात्र से शरीर के कष्ट और परिवार की विपदा टल जाती है और शनि मंदिर के बाहर जूते-चप्पल मंदिर के बाहर दान करने से शनि की बुरी दशा से मुक्ति मिलती है. इस कारण हाजारों की तादाद में जूते-चप्पल इक्कठे हो जाते हैं, जिसकी प्रशसन नीलामी करता है.