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शरद पूर्णिमा के दिन करें माता लक्ष्मी की पूजा, यहां जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

शरद पूर्णिमा के दिन व्रत का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद घर में पूजा कर घी का दीया जलाया जाता है. इसके बाद भगवान की पूजा की जाती है. मुख्य रूप से भगवान इंद्र और लक्ष्मी माता की शरद पूर्णिमा में पूजा होती है.

शरद पूर्णिमा के दिन करें माता लक्ष्मी की पूजा, यहां जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
शरद पूर्णिमा महत्व और पूजन विधि

नई दिल्लीः हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का खास महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शरद पूर्णिमा को कोजोगार पूर्णिमा व्रत और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी द्वारा समस्त जगत पर अमृत वर्षा करता है. यही वजह है कि आज के दिन सभी व्रती और अन्य लोग खीर बनाकर चांद की चांदनी में रख देते हैं और सुबह स्नान के बाद प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं.

इस साल शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन जो कोई भी व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि इस दिन लोग अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए व्रत रखते हैं. जो माताएं इस व्रत को रखती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं. वहीं, अगर कुंवारी कन्‍याएं यह व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है. शरद पूर्णिमा का चमकीला चांद और साफ आसमान मॉनसून चले जाने का प्रतीक भी माना जाता है. 

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शरद पूर्णिमा व्रत मुहूर्त
शरद पूर्णिमा तिथि आरंभ- 13 अक्टूबर 2019 को 12 बजकर 38 मिनट से
शरद पूर्णिमा तिथि समाप्त- 14 अक्टूबर 2019 को 2 बजकर 39 मिनट तक
चंद्रोदय - 13 अक्टूबर 2019 को शाम 5 बजकर 26 मिनट पर

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शरद पूर्णिमा पूजन विधि
शरद पूर्णिमा के दिन व्रत का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद घर में पूजा कर घी का दीया जलाया जाता है. इसके बाद भगवान की पूजा की जाती है. मुख्य रूप से भगवान इंद्र और लक्ष्मी माता की शरद पूर्णिमा में पूजा होती है. शाम में लक्ष्मी जी की पूजा करें और आरती उतारें. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रसाद चढ़ाएं और उपवाल खोल लें. 12 बजे के बाद खीर का प्रसाद बांटें.