महाभारत की रोचक बातें: क्या आप जानते हैं बलराम इस युद्ध में क्यों शामिल नहीं हुए?

महाभारत के युद्ध से जुड़ी ऐसी कई बातें जिनके बारे में शायद कम ही लोगों को पता होता है. उन्हीं में से एक है कि आखिर बलराम इस युद्ध में शामिल क्यों नहीं हुए. यहां जानें इसका कारण.

महाभारत की रोचक बातें: क्या आप जानते हैं बलराम इस युद्ध में क्यों शामिल नहीं हुए?
युद्ध का हिस्सा क्यों नहीं बने बलराम?

नई दिल्ली: श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे और उनके बड़े भाई बलराम शेषनाग के अवतार. बलराम (Balram) कितने शक्तिशाली थे इस बात से हर कोई परिचित है. भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) को जहां उनकी मनमोहक मुस्कान और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है वहीं, बलराम को उनके बल और गुस्से के लिए. लेकिन इतने बलशाली होने के बाद भी आखिर क्यों बलराम महाभारत के युद्ध (Mahabharat War) का हिस्सा नहीं बने? महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों और पांडवों के बीच 18 दिनों तक चला था, ये तो हम सभी जानते हैं. लेकिन युद्ध से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जो बहुत अधिक प्रचलित नहीं है और उन्हीं में से एक है बलराम का युद्ध में शामिल न होने का कारण. 

इस वजह से युद्ध में शामिल नहीं हुए बलराम

पांडव पुत्र भीम (Bheem) और धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन (Duryodhan)- दोनों के गुरु बलराम ही थे और उन्होंने ही दोनों को गदा चलाने की विद्या सिखायी थी. बलराम को कौरव (Kaurav) और पांडव (Pandav) दोनों ही बेहद प्रिय थे. ऐसे में जब पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध हुआ तो वे किसी का एक पक्ष लेकर दूसरे के साथ अन्याय नहीं करना चाहते थे. बलराम ने तो श्रीकृष्ण से भी यही कहा था कि उन्हें भी इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेना चाहिए क्योंकि युद्ध में शामिल दोनों ही पक्ष उनके ही संबंधी हैं.   

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बलराम दुर्योधन को पहले ही वचन दे चुके थे कि महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण और वे स्वंय शस्त्र नहीं उठाएंगे. इसलिए कृष्ण ने भी बलराम के वचन का मान रखा और युद्ध में बिना शस्त्र उठाए लेकिन अर्जुन के सारथी बनकर हिस्सा लिया. एक तरफ जहां महाभारत के युद्ध में छोटे बड़े राज्यों के सैंकड़ों राजाओं ने हिस्सा लिया था. कौरवों के साथ कृष्ण की नारायणी सेना सहित 11 अश्वरोहिणी सेना थी, वहीं दूसरी तरफ पांडवों के साथ केवल 8 अश्वरोहिणी सेना थी. बावजूद इसके बलराम ने युद्ध न करने का प्रण लिया और तीर्थ यात्रा पर निकल गए.

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जब पांडवों के पास पहुंचे बलराम

महाभारत ग्रंथ में एक और घटना का वर्णन मिलता है. इसके मुताबिक युद्ध से पहले एक दिन बलराम पांडवों से मिलने पहुंचे. पांडवों को आशा थी कि वे अपना निर्णय बदल देंगे और युद्ध में उनके साथ शामिल होंगे. लेकिन बलराम ने दुखी मन से कहा, 'मुझे युद्ध में कोई रूचि नहीं है. ये लोग आपस में लड़ कर मूर्खता कर रहे हैं. भीम और दुर्योधन दोनों ने ही मेरे शिष्य हैं. जिस तरफ कृष्ण हैं, उनके विपक्ष में मैं कैसे जाऊं? इसलिए मैं युद्ध में भाग नहीं लूंगा.'

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