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उज्जैनः शिव-पार्वती के रिसेप्शन पर पूरे शहर को न्यौता, बारात में जमकर नाचे भूत-पिशाच और भक्त

बाबा महाकाल की अनूठी बारात भी निकाली गई, जिसमें भूत-पिशाच के रूप में भक्त नाचते-गाते नजर आए.

उज्जैनः शिव-पार्वती के रिसेप्शन पर पूरे शहर को न्यौता, बारात में जमकर नाचे भूत-पिशाच और भक्त
19 सालों से चली आ रही है बारात-रिसेप्शन की परंपरा

अजय पटवा/उज्जैनः महाशिवरात्रि के त्यौहार के बाद उज्जैन में वैसे तो साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन शिवरात्रि और सावन सोमवार पर यहां का नजारा ही अलग होता है. ऐसा ही नजारा आज उज्जैन में देखने को मिला, जहां शिव-पार्वती के विवाह, बारात और रिसेप्शन की परंपरा निभाई गई. जिसमें देश भर से जनता हिस्सा लेती है. बाबा महाकाल के रिसेप्शन पर भक्तों का एक अलग ही रूप देखने को मिलता है. इस बार माता पार्वती और भगवान शिव का रिसेप्शन बाबा महाकाल के आंगन रुद्रसागर में हुआ. जहां 50 हजार से अधिक भक्तों ने हिस्सा लिया और 56 पकवानों का प्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान बाबा महाकाल की अनूठी बारात भी निकाली गई, जिसमें भूत-पिशाच के रूप में भक्त नाचते-गाते नजर आए. वहीं भक्तों का भी जमावड़ा देखने को मिला.

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बता दें बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में हर साल महाशिवरात्रि के बाद राजाधिराज बाबा महाकाल की बारात निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं. इस दौरान भक्त भूत-पिशाच की वेश-भूषा में नृत्य करते हैं और विवाह के बाद रिसेप्शन में हिस्सा लेते हैं. पिछले 19 सालों से महाकाल के भक्त हर साल शिव विवाह पर रिसेप्शन देते हैं, जिसके लिए आमंत्रण पत्र भी छपवाए जाते हैं. जिसके बाद बारात निकाली जाती है और फिर रिसेप्शन दिया जाता है.

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इसी क्रम में आज बाबा महाकाल की बारात निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाचते-गाते दिखे. वहीं भूत-पिशाच ने भी बाबा महाकाल की बारात में हिस्सा लिया और लोगों के बीच झूमते-नाचते दिखे. जिसके बाद बाबा के रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें छप्पन प्रकार के पकवान ग्रहण करने हजारों की संख्या में भक्त शामिल हुए. यह परम्परा लगभग 19 सालों से चली आ रही है. जहां शिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल के शादी समारोह का रिसेप्सन आयोजित किया जाता है. बता दें मंडप में शिव-पार्वती के लग्न की रस्म भी होती है. जिसमें सारी रस्में निभाई जाती हैं.