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उज्जैनः भूतड़ी अमावस्या पर लगा भूतों का मेला, देखने के लिए देश भर से जुटे लोग

 भूतड़ी अमवस्या के दिन यहां खासतौर पर मेला लगता है, जिसमें भूत-पिशाच का रूप धारण कर लोग नाचते-गाते हैं और अजीबो-गरीब हरकतें करते हैं.

उज्जैनः भूतड़ी अमावस्या पर लगा भूतों का मेला, देखने के लिए देश भर से जुटे लोग

उज्जैनः आज भूतड़ी अमावस्या पर उज्जैन के 52 कुंड पर भूतों का मेला देखने को मिला. इस कुंड से संबंधित मान्यता है कि जिस पर भी बुरी आत्मा का साया होता है अगर वह आज के दिन (भूतड़ी अमावस्या) पर एक बार 52 कुंड में से सूर्य कुंड और ब्रहम कुंड में डुबकी लगाकर स्नान करता है तो उस पर से सभी प्रकार की अला बला दूर हो जाती है. यही कारण है कि भूतड़ी अमवस्या के दिन यहां खासतौर पर मेला लगता है, जिसमें भूत-पिशाच का रूप धारण कर लोग नाचते-गाते हैं और अजीबो-गरीब हरकतें करते हैं. भूतड़ी अमावस्या के दिन क्षिप्रा नदी के किनारे लगने वाले इस मेले को भूतों के मेले के रूप में भी जाना जाता है.

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शरीर में लगी बुरी आत्माओं को भगाने के लिए यहां 52 और सूर्य कुंड में डुबकी लगाई जाती है. मान्यता है की ऐसा करने से सभी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है. स्कन्द पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड और सूर्य मंदिर यहां स्थापित थे, श्रद्धालु दूर दूर से यहां आते हैं और शरीर में लगी बुरी आत्मा को भगाने के लिए मां क्षिप्रा में डुबकी लगाते हैं. श्रृद्धालुओं का मानना है कि एक डुबकी से ही बुरी आत्मा से छुटकारा मिल जाता है. 52 कुंड में स्नान करने के लिए आज के दिन दूर दूर से श्रद्धालु नदी के अंदर उतरते हैं.

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ऐसे में यहां कई अजीबो-गरीब नजारे देखने को मिलते हैं, जहां कोई कोई अपनी जीभ तलवार से काटता दिखाई देता है तो कोई जोर-जोर से चिल्ला रहा होता है. किसी को जंजीर से बांध कर रखा जाता है तो कोई तलवार ले कर चिल्ला रहा है.  मान्यता है कि एक डुबकी से सभी कष्ट दूर करने के लिए 52 कुंड में भूतड़ी अम्मावस्या पर डुबकी लगाई जाती है. वहीं इस तरह के नजारे देखकर कई बार लोग डर भी जाते हैं और यहां कदम रखने से डरते हैं, लेकिन आस्था और अपनी समस्याओं के चलते वह यहां जरूर आते हैं.