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Mystery of Baba Baukhnag Temple on Silkyara Tunnel: उत्तरकाशी की रहस्यमयी वादियों में कहते हैं, कई सारी दैवीय शक्तियों का वास है. पहाड़ों में स्थानीय लोग देव-देवी के इन रूपों के प्रति इतनी श्रद्धा रखते हैं, कि इनके पूजा-ध्यान के बिना ना तो कोई काम शुरू करते हैं और ना ही किसी सफर की शुरुआत. आज की स्पेशल रिपोर्ट एक ऐसी ही स्वयंभू देव शक्ति की है, जिनका नाम 2 साल पहले हुए सिल्क्यारा टनल हादसे के दौरान सुर्खियों में आया था.
वो हादसा क्यों हुआ, और कैसे 40 मजदूरों को निकालने के लिए 17 दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला, इसके पीछे की कहानी जितनी वैज्ञानिक है, उतनी ही रहस्यमयी भी है. इसके पीछे बागा बौखनाग का ऐसा चमत्कार माना जाता है, जिसे उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने भी कैमरे के सामने कुबूल किया.
जब 17 दिनों तक सुरंग में फंस गए 40 लोग
12 नवंबर 2023 का वह दिन था, जब सिल्क्यारा में बन रही टनल धंस गई. इसके चलते अंदर काम कर रहे 40 लोग 17 दिन के लिए वहीं फंस गए. उन्हें निकालने के लिए 14वें दिन टनल के गेट पर बौखनाग देवता की प्रतिमा स्थापित करके उनकी पूजा की गई. इसके बाद अभियान को आगे बढ़ाया गया तो सफलता मिलनी शुरू हो गई.
ये वही बौखनाग देवता हैं, जिनका मंदिर आप सिल्कयारा टनल के ठीक किनारे देख रहे हैं. बुधवार को जब ये टनल यातायात के लिए क्लीयर किया गया, तब सीएम पुष्कर सिंह धामी भी यहां पहुंचे. टनल के औपचारिक शुरुआत से पहले सीएम धामी ने बौखनाग मंदिर में शीश नवाया और उस रेस्क्यू ऑपरेशन में बाबा के चमत्कारी योगदान की बात मीडिया के सामने कही.
यातायात के लिए तैयार हुई सिल्क्यारा टनल
सिल्कियारा टनल के 3 किलोमीटर अंदर जो हिस्सा धंसा था, वो अब पूरी तरह मरम्मत किया जा चुका है. पूरी 4.5 किमी लंबी सुरंग अब यातायात के लिए तैयार है. इसके साथ बाबा बौखनाथ का मंदिर भी. इलाके में ऐसी मान्यता है, कि टनल की खुदाई से पहले बाबा बौखनाथ का छोटा सा मंदिर खुदाई के दौरान हटा दिया गया था, जिसकी वजह से बाबा कुपित हो गए थे. तो क्या वो हादसा बाबा बौखनाथ के इसी कोप की वजह से हुआ था...?
तो आखिर कौन हैं ये बौखनाग बाबा? ये किस देवता के प्रतीक रूप हैं और उत्तरकाशी इलाके में इनकी मान्यता क्यों इतनी ज्यादा है? जी मीडिया की टीम जब सिल्क्यारा टनल का उद्घाटन कवर करने पहुंची, तो इन सारे सवालों के जवाब जानने की कोशिश की. हमारी स्पेशल रिपोर्ट के इस हिस्से में देखिए वो पूरा पारंपरिक उत्सव, जो बौखनाग मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान हुआ. ये उत्सव ही प्रतीक है उस आस्था का, जो उत्तरकाशी के जन-जन में व्याप्त है..
सिल्क्यारा टनल में 17 दिन तक जब 40 मजदूरों की सांसे अटकी हुई थीं, तब पूरा इलाका इसी बौखनाग देवता का आह्वान कर रहा था. उस त्राहिमाम की हालत में बाबा का ऐसा ही जयकारा और अखंड पूजा और जाप का आयोजन किया जा रहा था. इसके साथ एक चूक के लिए भी लोग बाबा बौखनाग से क्षमा मांग रहे थे.
कैसे कुपित हुए थे बाबा बौखनाग?
अवस्थी के मुताबिक, टनल के लिए खुदाई शुरू होने से पहले ही उन्होंने अनहोनी की आशंका जताई थी, क्योंकि बिना पूजा पाठ के ही बाबा बौखनाग का छोटा सा मंदिर सुरंग के रास्ते से हटा दिया गया था. इसी मान्यता को देखते हुए मंदिर के पुजारी ने चेतावनी दी थी, लेकिन मंदिर हटाने के बाद जब तक इसका पुनर्निर्माण होता, तब तक एक दिन अचानक सुरंग बीच में से ही धंस गई.
जी मीडिया की टीम ने तब भी 17 दिन तक पूरा ऑपरेशन कवर किया था. तब भी दबी जुबान से बाबा बौखनाग के कुपित होने की बातें चल रही थी. इसकी पुष्टि तब हुई, जब सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर में जाकर पूजा की और ये मन्नत मांगी थी, कि हादसे में फंसे 40 मजदूर सुरक्षित वापस आ जाएंगे, तो वो बाबा बौखनाथ का भव्य मंदिर बनवाएंगे.
बाबा बौखनाथ की इन्हीं चमत्कारी शक्तियों को देखते हुए सीएम धामी ने टनल निर्माण पूरा होने के साथ ही भव्य मंदिर का निर्माण कराया और इसमें देवता की प्राण प्रतिष्ठा भी.
पहाड़ के लोग मानते हैं अपना इष्टदेव
बाबा बौखनाथ को सिल्क्यारा समेत उत्तरकाशी के कई गावों में ईष्ट देव माना जाता है. कहीं इन्हें भगवान शिव, तो कहीं श्रीकृष्ण तो कहीं इन्हें बासगी नाग की शक्तियों वाला माना जाता है. चार धाम के यात्रा मार्ग पर ये मंदिर, जब छोटा सा था, तभी लोगों के बड़े आकर्षण का केन्द्र हुआ करता था.
बौखनाग बाबा के जिस सालाना मेले की बात मंदिर के पुजारी कर रहे हैं, उसका दृश्य कुछ ऐसा ही होता है. भगवान शिव और उनके गले में लिपटने नाग वासुकी की सम्मिलित शक्तियों का जागरण कुछ ऐसे ही उत्सव के साथ होता है. माना जाता है कि बाबा बौखनाग की यहां बासगी नाग के रूप में उत्पत्ति हुई. भगवान श्रीकृष्ण टिहरी जनपद के सेम-मुखेम से पहले यहां पहुंचे थे.
हर साल लगता है भव्य मेला
इसी के कारण हर साल सेम मुखेम और दूसरे साल बौखनाग में भव्य मेला आयोजित होता है. मान्यताओं के अनुसार जो दंपत्ति निसंतान है वह इस पर्व में नंगे पैर आकर बाबा बौख नाग के दर्शन करता है, तो उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है. इसके साथ ही सुख-समृद्धि और अपनी इच्छाओं का पूरी के लिए यहां पर भक्त श्रद्धा के साथ अर्जी लगाते हैं. इनकी पूजा-अर्चना करके इलाके की रक्षक की कामना की जाती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)