मानव तस्करों के निशाने पर बचपन, बाल मजदूरी की जद में लाखों मासूम

Last Updated: Thursday, June 18, 2015 - 00:36
मानव तस्करों के निशाने पर बचपन, बाल मजदूरी की जद में लाखों मासूम

कानपुरः मानव तस्करी के निशाने पर आया बचपन बाल मजदूरी की ज़द में गुम होता जा रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बच्चे मानव तस्करों के निशाने पर हैं। ये मानव तस्कर बड़ी संख्या में बच्चों को महाराष्ट्र और राजस्थान भेज रहे हैं, जहां उनसे घर, फैक्ट्रियों और व्यावसायिक ठिकानों पर मजदूरी कराई जाती है।

सूबे के श्रम विभाग ने भी एक सर्वे के आधार पर बाल श्रमिकों की संख्या 22 लाख बताई है। इस तरह के बाल श्रमिकों के ठिकानों का पता लगाने के लिए अब आईआईटी कानपुर के ह्यूमैनिटी सेल की मदद ली जा रही है। इस बीच कई राज्यों के खुफिया विभागों ने बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर वापस उत्तर प्रदेश भेजा है, लेकिन जितने बच्चे लौटे थे उससे ज्यादा फिर सप्लाई किए जा चुके हैं। तस्करी का यह जाल पूर्वांचल में ज्यादा खतरनाक बन चुका है।

एक सर्वे के मुताबिक प्रदेश में बाल श्रमिकों की सबसे ज्यादा संख्या इलाहाबाद में है। यहां पर एक लाख से ज्यादा बच्चे काम में लगे हैं। इसके बाद बरेली और जौनपुर का नंबर आता है। कई जगहों से तो बच्चों और बच्चियों के दैहिक शोषण की भी खबरें आई हैं। मिर्जापुर और भदोही के कालीन उद्योग, फिरोजाबाद के कांच उद्योग और मुरादाबाद के पीतल उद्योग में हजारों की संख्या में बाल मजदूर काम करते हैं।

इस दिशा में काम करने के लिए विभाग के लिए आप भी व्हाट्स एप के माध्यम से बालश्रम में लगे बच्चों की वीडियो या फोटो भेजकर अपना योगदान दे सकते हैं। साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1098 पर भी संपर्क कर सकते हैं। 

नियम कानूनों की परवाह किये बिना कारखानों में इनसे काम लिया जाता है। वहीं होटलों और ढाबों में भी हजारों की तादाद में बच्चे काम करते हैं। घरेलू नौकर के तौर पर भी हजारों बच्चों की ज़िंदगी जलालत को आत्मसात कर लेती है और देखते-देखते एक सुनहरे बचपन का क़त्ल कर दिया जाता है।
इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टः राजेश एन अग्रवाल, ज़ी मीडिया कानपुर

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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