पुलिस, आबकारी विभाग के गठजोड़ से फल-फूल रहा है अवैध शराब का धंधा: तहक़ीक़ात

By Lalit Fulara | Last Updated: Tuesday, January 13, 2015 - 19:25
पुलिस, आबकारी विभाग के गठजोड़ से फल-फूल रहा है अवैध शराब का धंधा: तहक़ीक़ात

ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर गांव-गांव में अवैध शराब बनाने की भट्टिया देखी जा सकती हैं। अवैध शराब का यह धंधा पुलिस, आबकारी विभाग और शराब माफियाओं के सांठगांठ से चलता है।
कबूतरी समुदाय बड़ी तादाद में जुड़ा है अवैध शराब के धंधे से...
ललितपुर में निवास करने वाला 'कबूतरा' समुदाय अवैध शराब के इस धंधे में काफी तादाद में जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, गांव के दबंगों और रसूखदार लोग भी इस धंधे में लिप्त हैं।
ज़ी संगम की टीम ने अवैध रूप से फलते-फूलते इस कारोबार की तहकीकात की..
ज़ी सगम की टीम जब ललितपुर कोतवाली अंतर्गत झांसी-ललितपुर राष्ट्रीय राजमार्ग NH 26 के किनारे स्थित चीरा ग्राम और मऊ गांव में पहुंची तो यहां बड़े पैमाने पर शराब की भट्टियां जल रही थीं।
इन भट्टियों में कच्ची शराब बनाई जा रही थी। यही हाल तालबेहट कोतवाली अंतर्गत आने वाले बदरेला, टकटकी, सेरवास, गणेशपुरा गांवों का भी है।
इसके अलावा, पूराकला थाने के अंतर्गत उगरपुर, चौबारा, चौचंदया गांवों में भी अवैध शराब बनाने का यह धंधा काफी फल-फूल रहा है। शराब माफियाओं ने आस-पास के जंगलों और नदियों के किनारे शराब बनाने का ठिकाना बना रखा है।
जहरीला बनाने के लिए यूरिया और बेसरम के पत्ते का इस्तेमाल...
शराब माफिया कच्ची शराब को ज़्यादा नशीला बनाने के लिए यूरिया और बेसरम के पत्तों का इस्तेमाल करते हैं। इससे कच्ची शराब काफी जहरीली बन जाती है और लोगों को जान गवानी पड़ती है।
शराब माफियों से बातचीत...
शराब माफियों का साफ कहना है कि कच्ची शराब के इस धंधे में उन्हें पुलिस और आबकारी विभाग का भरपूर सहयोग मिलता है। पूरे जिले में यह धंधा पुलिस के संरक्षण के बतौर ही फल-फूल रहा है।
शराब माफियों से लड़ने के लिए ना फोर्स है ना ही संसाधन: आबकारी अधिकारी 
जिला आबकारी अधिकारी धीरज सिंह का कहना है कि कच्ची शराब का यह धंधा जिले में काफी तादाद में फल-फूल रहा है। उनका कहना है कि इसे रोकने में आबकारी विभाग भी सक्षम नहीं है। धीरज सिंह का कहना है कि शराब माफियाओं से लड़ने के लिए आबकारी विभाग पर न ही संसाधन है और ना ही पर्याप्त फोर्स। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद और उन्नाव में कच्ची शराब पीने से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बाद भी प्रशासन और पुलिस अवैध शराब के इस कारोबार पर रोक लगा पाने में नाकाम साबित हो रही है।
अमित सोनी ज़ी मीडिया ललितपुर

 

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