अथॉरिटी के माली से बना कंपनी का मालिक, सरकार को लगाया 400 करोड़ का चूना

By Pritesh Gupta | Last Updated: Saturday, March 14, 2015 - 16:44
अथॉरिटी के माली से बना कंपनी का मालिक, सरकार को लगाया 400 करोड़ का चूना

ग्रेटर नोएडाः हाल ही में हुए नोएडा अथॉरिटी के घोटाले का मामला पूरी तरह सुलझ भी नहीं पाया था कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में एक नया मामला सामने आया है। ज़ी संगम की पड़ताल में एक ऐसे घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को करीब 400 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। घोटाले का यह मामला MMR स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर की गई जमीन की धांधली से संबंधित है। मामले में अतुल 

माली से मालिक तक का रोचक सफर
घोटाले के मास्टरमाइंड MMR कंपनी के मालिक महिपाल की कहानी भी रोचक है। एक बड़ी राजनीतिक हस्ती का करीबी यह शख्स कभी नोएडा अथॉरिटी में माली का काम करता था। लेकिन 2008 में उसने नौकरी छोड़ दी और अलग कंपनी बना ली। अथॉरिटी के माली से कंपनी के मालिक तक सफर तय करने वाले इस शख्स ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए।

मिलीभगत से लगाई 400 करोड़ की चपत
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में हुए इस भ्रष्टाचार में एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अथॉरिटी के अफसरों ने सारे नियम-कायदे ताक पर रख दिए। मिलीभगत के बूते MMR स्पोर्ट्स सिटी को अरबों की जमीन कौड़ियों के दामों पर दे दी गई। पूरे मामले में सरकारी खजाने को करीब 400 करोड़ की चपत लगाई गई है।

रजिस्ट्री में गड़बड़ कर ऐसे लगाई चपत
MMR कंपनी ने जमीन स्पोर्ट्स सिटी बनाने के नाम पर सस्ते दामों में जमीन ली थी। परियोजना के तहत 30 मार्च 2011 को MMR कंपनी के कंसोर्टियम को 5.26 लाख वर्गमीटर जमीन दी गई थी, जिसके बाद कंसोर्टियम को तोड़कर ये जमीन महिपाल के करीबी लोगों की 13 नई कंपनियों को दे दी गई और उनकी रजिस्ट्री भी करा दी गई, जबकि MMR कंपनी पर अथॉरिटी का 80 करोड़ रुपये भी बकाया हैं। ये कंपनियां अब यहां हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रही है। जिन कंपनियों की रजिस्ट्री हुई उनसे कोई धनराशि नहीं ली गई। कंसोर्टियम ने जो रुपये आवंटन के समय अथॉरिटी को दिए थे, उसे ही जमीन के आनुपातिक औसत में बांटकर अपनी-अपनी जेब भर ली गई। जिससे सरकार और अथॉरिटी को करीब 45 करोड़ 96 लाख 43 हजार 93 रुपए का नुकसान हुआ।

स्टांप ड्यूटी और टाइटल ट्रांसफर में हुआ घोटाला
नियमों को ताक पर रखकर किए गए खरीदी-बिक्री के इस खेल में यदि नियमों के मुताबिक जमीन की दो बार रजिस्ट्री कराई जाती तो की कुल कीमत का 16 फीसदी स्टांप शुल्क (करीब 56 करोड़ 57 लाख 14 हजार 576 रुपये) चुकाने पड़ते। लेकिन सरकार को महज 28 करोड़ 28 लाख 57 हजार 288 रुपये की स्टांप ड्यूटी ही मिल पाई। इसके अलावा कंसोर्टियम अपनी स्पेशल पर्पज कंपनियों की सब लीज कराता तो टाइटल ट्रांसफर कराना पड़ता, जिसके लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी संपत्ति का करीब पांच फीसदी चार्ज वसूलती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिससे अथॉरिटी को करीब 17 करोड़ 67 लाख 85 हजार 805 रुपये का नुकसान हुआ।

26 मार्च को होगी सुनवाई
वहीं अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, विकास प्राधिकरण और संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर 26 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है। 26 मार्च को मामले की फिर से सुनवाई होगी।
रिपोर्टः अनुराग चड्ढा, ज़ी मीडिया, ग्रेटर नोएडा

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