खतरनाक बीमारियों के शिकार हैं सोनभद्र के लोग, दूषित पानी बना जिंदगी का दुश्मन... न NGT के निर्देश का असर न प्रशासन का

Last Updated: Monday, November 24, 2014 - 20:39
खतरनाक बीमारियों के शिकार हैं सोनभद्र के लोग, दूषित पानी बना जिंदगी का दुश्मन... न NGT के निर्देश का असर न प्रशासन का

सोनभद्रः देश के बड़े पावर हब के रूप में जाना जाने वाला सोनभद्र इस विकास की बड़ी कीमत चुका रहा है। प्रदूषण की मार झेल रहे सोनभद्र के लोगों में कई भयंकर बीमारियां फैलती जा रही है। 

आसपास के गांवों में भी फैल रही बीमारियां
सोनभद्र जनपद के लोग पिछले एक दशक से फ्लोरोसिस नामक बीमारी से परेशान हैं। फ्लोरोसिस से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अभी तक यह बीमारी जिले के चोपन, म्योरपुर, बभनी दुद्धी के विकासखंडों में देखने को मिल रही थी, लेकिन अब अनपरा और आसपास के लगभग 10 गांवों में भी इस बीमारी के मरीज मिल रहे हैं।

अपशिष्ट पदार्थों को सीधे डेम में मिलाने से हुए हालात खराब
इन बीमारियों का मूल कारण यहां स्थापित करीब एक दर्जन पावर प्रोजेक्ट है, जो अपना अपशिष्ट पदार्थ सीधे रिहंद डेम में छोड़ते हैं, जिसके चलते क्षेत्र का जल पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। इस प्रदूषित जल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। गांवों के लोग दांतों में धब्बे पड़ जाना, हाथ-पैर टेढ़े हो जाना, जोड़ों में दर्द, विकलांगता जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं।

प्रशासन के निर्देश भी काम नहीं आए
बीमारियों के चलते गांव के लोगों को अब शादी करने के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से कई बार कैंप लगाकर इन इलाकों में मरीजों का इलाज किए जाने के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन वे सिर्फ कागजी कवायदों में दब कर रह गया है। मजबूर लोगों को वही प्रदूषित पानी नसीब हो रहा है। डॉक्टर्स का मानना है कि ग्रामीणों की इन समस्याओं का इलाज नहीं है, इनकी रोकथाम ही सबसे बड़ा बचाव है।

एनजीटी के निर्देश भी बेअसर
समय-समय पर प्रदूषण के खिलाफ लोग एकजुट भी होते रहे हैं, लेकिन इससे औद्योगिक इकाइयों का संचालन करने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी अपील की जा चुकी है। एनजीटी में अपील करने वाले जगत विश्वकर्मा कहते हैं कि उनकी अपील पर औद्योगिक इकाइयों को निर्देश मिले थे कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए और कोई भी उद्योगों से निकलने वाला कचरा रिहंद डेम में नहीं डालेगा। लेकिन उसके बाद भी हालात जस के तस हैं। इस संबंध में जब प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कलिका सिंह से बात की गई तो उन्होंने माना कि अत्याधुनिक प्रदूषित इलाकों में इस तरह की समस्याएं आई है और लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट लगाए जा रहे हैं।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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