अधिकारियों की पत्नियों को महंगे गिफ्ट देता था शैलेंद्र, पढ़ें क्या है यूपी पुलिस का ट्रांसफर सिंडिकेट?

By Lalit Fulara | Last Updated: Saturday, June 13, 2015 - 17:02
अधिकारियों की पत्नियों को महंगे गिफ्ट  देता था शैलेंद्र, पढ़ें क्या है यूपी पुलिस का ट्रांसफर सिंडिकेट?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग सिंडिकेट में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शैलेंद्र यादव के मोबाइल और कम्प्युटर  से कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि आगरा का रहने वाला शैलेंद्र अक्सर लखनऊ के एक होटल में ठहरता था। शैलेंद्र पुलिस अधिकारियों और उनकी पत्नियों को महंगे गिफ्ट दिया करता था। इसके बाद वह पत्नियों के जरिए अधिकारियों से काम निकलवाता था।

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शैलेंद्र ने कई पुलिस अधिकारियों को भी अपने ठगी का शिकार बनाया था। उसके लखनऊ में एक डीआईजी को भी अपने ठगी का शिकार बनाया था। डीआईजी की पत्नी ने उसके खिलाफ इस मामले में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। बताया जा रहा है कि इस पूरे सिंडिकेट को चलाने के लिए शैलेंद्र अधिकारियों को अपने व्यापार में शेयर भी दिया करता था।
शैलेंद्र के दो पूर्व डीआईजी से नजदीकी संबंध बताए जा रहे हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, आगरा पुलिस की एक टीम इस मामले की छानबीन के लिए दिल्ली पहुंची है। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र सरकारी अधिकारियों और व्यापारियों से अब तक 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की वसूली कर चुका है।

 यूपी पुलिस का ट्रांसफर सिंडिकेट! फिक्स था पोस्टिंग और ट्रांसफर का रेट

गौरतलब है कि इस संबंध में 9 जून को गाजियाबाद के एएसपी धर्मेंद्र यादव ने एक खत लिखा था। उनके खत से आईपीएस लॉबी में हड़कंम मच गया था। इसके बाद बुधवार को  आईपीएस एसोसिएशन ने आपात बैठक की थी। धर्मेंद्र यादव ने अपने खत में दो पूर्व डीजीपी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की थी। वहीं, इस पूरे मामले में डीजीपी एके जैन का कहना था कि मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आगरा के एसपी नेता शैलेंद्र यादव के मोबाइल और कम्प्युटर से इस ट्रांसफर सिंडिकेट का खुलासा हुआ था। शैलेंद्र के मोबाइल दो पूर्व डीजीपी के मैसेज मौजूद थे। मैसेज में दारोगा के पोस्टिंग-प्रमोशन का रेट लिखा हुआ था। पोस्टिंग का रेट 7 लाख रुपए और ट्रांसफर का रेट 20 लाख रुपए फिक्स किया गया था। बताया जा रहा है कि शैलेंद्र ने पोस्टिंग के लिए कई बड़े नेताओं पर दबाव बनाया था। उसके मोबाइल से कई नेताओं की डिटेल भी मिली है।  

ट्रांसफर सिंडिकेट के इस पूरे खेल में 'शर्ट', 'मुर्गा', 'बकरा', 'मिठाई इत्यादि कोडवर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। एसएमएस के जरिए यह कोडवर्ड फिक्स होता था और फिर रिश्वत ली जाती थी।
इस पूरे बात का खुलासा शैलेंद्र के मोबाइल से मिले एसएमएस से हुआ है। क्लाइंट के लिए 'मुर्गा' कोडवर्ड फिक्स किया गया था। इसके अलावा 'बकरा' बड़े क्लाइट को कहा जाता था। 'मिठाई' को़ड का मतलब होता था एक करोड़ की रिश्वत देना। 'शर्ट' से आशय रिश्वत के लिए एक लाख रुपए की मांग करना होता था।

 

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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