1,000 करोड़ का मालिक है यादव सिंह, पार्क में पाले थे कबूतर, पढ़ें, क्या है 30% का खेल?

By Lalit Fulara | Last Updated: Sunday, November 30, 2014 - 19:11
1,000 करोड़ का मालिक है यादव सिंह, पार्क में पाले थे कबूतर, पढ़ें, क्या है 30%  का खेल?

नोएडा: नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर और करोड़ों की संपत्ती के मालिक यादव सिंह को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यादव सिंह ने अपने दो दर्जन से ज़्यादा करीबी लोगों को नोएडा प्राधिकरण में नौकरी पर लगाया था। सूत्रों की माने तो यादव सिंह ने जिन लोगों को अपने रसूख के बल पर नौकरी पर लगाया था वह उनके जरिए ही घपले- घोटालों को अंजाम देता था। सूत्रों का कहना है कि यादव सिंह का पूरा नेटवर्क इन्हीं लोगों के जरिए चलता था।

निजी पार्क में पाल रखे थे मुगलकालीन कबूतर

यादव सिंह के नोएडा सेक्टर 51 स्थित घर में इनकम टैक्स विभाग को लाखों के कबूतर पाले जाने के सबूत भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि एक-एक कबूतर की कीमत 2 लाख रुपए से ज़्यादा है। यादव सिंह ने इन कबूतरों को ग्रीन बेल्ट में बनाए गए अपने निजी पार्क में पाल रखा था। कबूतरों की यह नस्ल मुगलकालीन बताई जा रही है। आज दुनिया में इन कबूतरों की संख्या बेहद कम हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इन कबूतरों को छोड़ दिया गया है या फिर किसी ने इन्हें चुरा लिया है।

कसने वाला है ईडी का शिकंजा

यादव सिंह पर अब प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कसने जा रहा है। यादव के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। ईडी के प्रवक्ता के मुताबिक, आयकर विभाग से यादव सिंह पर कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों के संबंध में पूरी जानकारी मांगी है। इसी के आधार पर यह कार्रवाई की जाएगी।  आयकर विभाग सोमवार से यादव सिंह के खिलाफ अपना मिशन शुरू करेगा। इस मिशन में करीब 300 बेशकीमती प्लॉट और कई अफसरों की जन्मपत्री खंगाली जाएगी।

एक हजार करोड़ रुपए का मालिक है यादव सिंह

नोएडा प्राधिकरण का पूर्व इंजीनियर यादव सिंह एक हजार करोड़ रुपये का मालिक है। यादव सिंहर ने यह अकूत संपत्ती घपलों और घोटाले के जरिए इकट्ठा की थी। बतौर चीफ इंजीनियर यादव सिंह की सैलरी 1.25 लाख रुपए महीना थी। यादव सिंह ने 34 साल नौकरी की और उसकी सैलरी के हिसाब से यादव सिंह की संपत्ती 5 करोड़ रुपए तक बनती है। लेकिन, घपलों के इस सौदागर की मौजूदा संपत्ती 1 हजार करोड़ रुपए से ज़्यादा बताई जा रही है।

30 पर्सेंट कमीशन लेता था

सूत्रों का कहना है कि यादव सिंह के अकूत संपत्ती के पीछे 30 पर्सेंट कमीशन का खेल है। सूत्रों का कहना है कि जब भी अथॉरिटी किसी बिल्डर को जमीन आवंटन करती थी तो जमीन की कीमत के ठीक बराबर ही काला धन बिल्डर को देना होता था। इस कालेधन में यादव सिंह का 30 पर्सेंट हिस्सा होता था।

कैसे बना लूट का सम्राट
1980 में यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नियुक्त हुआ।
1985 में यादव सिंह को प्रमोशन मिला और वो असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर बन गया।
1995 में यादव सिंह को प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया।
2002 में बीएसपी के शासनकाल में कई सीनियर्स को पीछे छोड़ते हुए यादव सिंह को चीफ़ मेंटेनेंस इंजीनियर बना दिया गया।
2011 में यादव सिंह को नोएडा अथॉरिटी का चीफ इंजीनियर बनाया गया।

कब-कब हुई कार्रवाई
2012 में 13 जून को 954 करोड़ के घोटाले के आरोप में यादव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। उसके घर पर सस्पेंशन नोटिस चिपकाने के साथ ही ऑफिस भी सील कर दिया गया। यादव सिंह और गाजियाबाद की 2 कंस्ट्रक्शन कंपनियों के खिलाफ़ केस भी दर्ज कर लिया गया।
2012 में 23 नवंबर को सीआईडी की क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी गई।
2013 में 7 नवंबर को फिर राज्य सरकार ने उसे नोएडा अथॉरिटी के चीफ़ इंजीनियर पद पर काबिज कर दिया। हालांकि, सीआईडी और विभागीय जांच उनके खिलाफ चल रही थी।
2014 में 12 नवंबर को यादव सिंह को ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।
2014 में 28 नवंबर को यादव सिंह से सभी पद छीन लिए गए और कार्मिक विभाग में अटैच कर दिया गया।

रिपोर्टर- अमित चौधरी, अविनाश विद्यार्थी

 

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

116494177177165543003


comments powered by Disqus

© 1998-2015 Zee Media Corporation Ltd (An Essel Group Company), All rights reserved.