सभी धर्मों के बीच आत्‍मीयता बनाए रखने की जरूरत, अपने हितों की रक्षा के साथ दूसरे के हितों का भी ख्‍याल रखें: मोहन भागवत

Last Updated: Thursday, October 22, 2015 - 22:20
सभी धर्मों के बीच आत्‍मीयता बनाए रखने की जरूरत, अपने हितों की रक्षा के साथ दूसरे के हितों का भी ख्‍याल रखें: मोहन भागवत

नागपुर : दशहरा के मौके पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुवादी संगठन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गुरुवार को कहा कि पूरे समाज से भेदभाव खत्‍म करना चाहिए। इस कार्यक्रम का आयोजन नागपुर के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्थित विशाल रेशमीबाग मैदान में किया गया। विभिन्न हिंदुवादी संगठनों और नेताओं के हाल ही में कई विवादों में शामिल होने की पृष्ठभूमि में आरएसएस प्रमुख का यह संबोधन खास अहमियत रखता है।
 
भागवत ने कहा कि हम समाज में एक दूसरे का पूरक बनकर चलें। आज पूरे देश में उम्‍मीद का वातावरण बना है। उन्‍होंने कहा कि अपने हित की रक्षा करें और दूसरे के हित का ध्‍यान रखें। सारे धर्म आपस में आत्‍मीयता बनाए रखें। नए भारत के लिए लोगों को मानसिक दासता छोड़नी होगी। भारत में सभी पंथ और संप्रदाय का सम्‍मान होता है, ऐसे में हमें विविधताओं का ध्‍यान रखना होगा। भारत के पास परंपरा और संतुलन के कई मॉडल हैं। सबसे मधुर संबंध बनाए रखने जरूरी हैं। उन्‍होंने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि आज कई नेता सामाजिक सदभाव की उपेक्षा कर रहे हैं। हमें संस्‍कार, नैतिकता और कर्तव्‍यबोध को ध्‍यान में रखना चाहिए। हम सभी संप्रदाय और मानव जाति के विकास की बात करते हैं। विचार और विचारधारा अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी लोगों को मिलकर चलना जरूरी है। लोगों में मतभेद हो सकते हैं लेकिन सभी को मिलकर चलना ही होगा। 

संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों में एक विश्‍वास बना है, विश्‍व में भारत की प्रतिष्‍ठा बनी है। हमें भारत को दुनिया में नंबर एक बनाने की दिशा में सोचना चाहिए। भारत के नए रूप का निर्माण करना होगा। संपूर्ण भारत को एक दूसरे का पूरक बनाना है। आज पूरी दुनिया में भारत का नाम हो रहा है। भारत ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। हमें विदेशी संस्‍कृति का अनुसरण करने की जरूरत नहीं है। हमें विश्‍व को नेतृत्‍व देने वाला भारत बनाना है।  

इससे पहले भागवत ने पंडित दीनदयाल को याद किया और कहा कि पंडित दीनदयाल ने देश को राह दिखाई। उन्‍होंने एकात्‍म मानव दर्शन दिए।  

इस मौके पर डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष और नीति आयोग के सदस्य विजय कुमार सारस्वत इस समारोह में मुख्य अतिथि बने। हाल में अपने कुछ वक्तव्यों में उन्होंने आरक्षण प्रणाली की समीक्षा का सुझाव दिया था, जिसकी विपक्षी दलों ने भारी आलोचना की और भाजपा को अपने संरक्षक से दूरी बनाने पर मजबूर होना पड़ा।

गौर हो कि आरएसएस प्रमुख इस दिन संगठन के वषर्भर के कार्यों का लेखा जोखा कार्यकर्ताओं के साथ साझा करते हैं और महत्वपूर्ण घटनाओं पर अपनी राय रखते हैं। हिंदू तिथि के अनुसार दशहरे के दिन ही आरएसएस का स्थापना दिवस भी होता है।

 

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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