जघन्य अपराध के लिए अब 16 साल के नाबालिगों को भी सजा मिलेगी

Last Updated: Thursday, April 23, 2015 - 16:15
जघन्य अपराध के लिए अब 16 साल के नाबालिगों को भी सजा मिलेगी

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने किशोरों संबंधी कानूनों में बदलाव करते हुए जघन्य अपराधों में शामिल 16 वर्ष से अधिक आयु के बालकों को "व्यस्क" मानने का प्रस्ताव किया है। अभी तक 18 वर्ष तक बालकों को बाल अपराधी माना जाता है। 

संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि कैबिनेट ने किशोर न्याय ( बच्चों की देखभाल और संरक्षण ) अधिनियम में संशोधनों को मंजूरी प्रदान कर दी है जहां 16 से 18 साल आयु वर्ग के किशोर अपराधियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है यदि वे जघन्य अपराधों के आरोपी हैं ।
यह विषय दो सप्ताह पहले कैबिनेट के समक्ष लाया गया था लेकिन अंतिम क्षणों में इसे एजेंडा से हटा दिया गया था और यह तय किया गया था कि मंत्रियों का एक अनौपचारिक समूह इस मुद्दे की पड़ताल करेगा।

संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को नामंजूर करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने का फैसला किया। उच्चतम न्यायालय ने भी हाल ही में कहा था कि बलात्कार, हत्या , डकैती और तेजाब हमलों जैसे अपराधों को किशोरों द्वारा अंजाम दिए जाने के मामलों में किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों की समीक्षा की जरूरत है ।  

भाषा



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