भारी विरोध के बीच संसद में पेश हुआ जीएसटी बिल

Last Updated: Friday, April 24, 2015 - 17:17
भारी विरोध के बीच संसद में पेश हुआ जीएसटी बिल

नई दिल्ली: विपक्षी दलों के जबरदस्‍त विरोध के बीच शुक्रवार को लोकसभा में बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक विचार के लिए पेश किया गया और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्यों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे केन्द्र और राज्य दोनों समान रूप से लाभ की स्थिति में होंगे।

सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के सदस्यों के साथ तृणमूल कांग्रेस, जेडीयू, सपा, आरजेडी, वाम मोर्चा, एनसीपी ने इस संविधान संशोधन विधेयक को स्थायी समिति को भेजने की मांग की। मांग नहीं स्वीकार किये जाने पर इन दलों ने सदन से वॉकआउट किया। एआईएडीएमके और बीजेडी ने भी इस विधेयक को विचारार्थ पेश करने का विरोध किया लेकिन सदन से वॉकआउट नहीं किया। विपक्षी दल नये विधेयक का अध्ययन करने के लिए और समय चाहते थे।

सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्षी दलों के बीच प्रक्रियागत सवाल पर करीब एक घंटे तक चली जिरह के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि 28 अप्रैल को गुलोटिन से पहले निर्धारित मंत्रालयों की अनुदान की मांगों पर चर्चा को पूरा किया जायेगा। उनके इस आश्वासन पर यह विधेयक चर्चा एवं पारण के लिए पेश किया जा सका।

अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने व्यवस्था दी कि यह महत्वपूर्ण विधेयक है और वित्त मंत्री इसे पेश करते हुए अपनी बात रख सकते हैं और इस पर चर्चा बाद में कराई जा सकती है। विधेयक को चर्चा के लिए पेश करते हुए जेटली ने कहा कि जहां तक राज्यों और केंद्र का सवाल है जीएसटी सभी के लिए समान लाभ के अवसर देने वाली स्थिति होगी। इससे भारत का जीडीपी बढ़ेगा, भारत का राजस्व बढ़ेगा और इसलिए मैं जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को सदन में विचार के लिए पेश कर रहा हूं।

भाषा



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