IT के शिकंजे में NOIDA का लुटेरा यादव सिंह , मिशन ब्लैक मनी में मायावती तक पहुंच सकती है 'जांच की आंच'

Last Updated: Thursday, November 27, 2014 - 20:29
IT के शिकंजे में NOIDA का लुटेरा यादव सिंह , मिशन ब्लैक मनी में मायावती तक पहुंच सकती है 'जांच की आंच'

लखनऊ/नोएडाः नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई खुलासे हुए। यादव सिंह पर हुई इस कार्रवाई को कालेधन के खुलासे की मुहिम के तहत मायावती तक पहुंचने की सीढ़ी माना जा रहा है। हालांकि कार्रवाई के बाद से एसपी और बीएसपी दोनों ही दलों के नेता चुप्पी साधे बैठे हैं।

करीब 40 फर्जी कंपनियां चला रहा है यादव सिंह
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डीजी कृष्णा सैनी से मिली जानकारी के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह, उसकी पत्नी कुसुमलता और कारोबारी पार्टनर्स के नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली स्थित करीब 20 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान टीम को बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं के अहम सबूत मिले हैं। कार्रवाई के दौरान कुसुमलता और पार्टनर अनिल पेशावरी, नम्रता मनोचा, राजेंद्र मनोचा आदि का नाम सामने आया है। इनकी कंपनियां मीनू क्रिएशन और भूमिका क्रिएशन कपड़ों और रियल एस्टेट का कारोबार करती है। इसके अलावा करीब 40 कंपनियां फर्जी तरीके से कारोबार कर रही है।

रियल एस्टेट की आड़ में पद का दुरुपयोग
रियल एस्टेट की इन कंपनियों की आड़ में यादव सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए खूब माल कमाया। छापेमारी की कार्रवाई के दौरान कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि यादव सिंह का कई रियल एस्टेट और IT कंपनियों में शेयर हैं। यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी के ठेकेदारों के एक खास समूह के जरिए ठेकेदारी का नेटवर्क भी चलाते हैं। साथ ही अपने करीबियों को सस्ते दामों पर प्लॉट आवंटित कराकर महंगे दामों पर बेचते हैं।

कालेधन के कुबेरों पर शिकंजे की मुहिम
इस कार्रवाई का श्रेय कालेधन की जांच के लिए बनी एसआईटी को और जस्टिस शाह को भी जाता है, जिन्होंने कालाधन रखने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू किया है। यादव सिंह पर हुई कार्रवाई भी इसी मुहिम का हिस्सा लग रहा है।

पहले माया मेहरबान फिर समाजवादी पार्टी
मायावती के राज में रसूखदार माने जाने वाले यादव सिंह और सैकड़ों करोड़ के घोटाले के आरोप लगने के बाद भी पद पर बने हुए हैं। यादव सिंह के करीबियों पर हो रही कार्रवाई को बीएसपी अध्यक्ष मायावती तक पहुंचने का जरिया माना जा रहा है। यादव पर पहले भी मायावती के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लेकिन यादव सिंह की करतूतों की अनदेखी करते हुए उसे महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखा। तब समाजवादी पार्टी ने विपक्ष में होने के नाते खूब हल्ला मचाया था। सत्ता में आने के बाद समाजवादी पार्टी ने कार्रवाई भी की, लेकिन कुछ ही दिनों में मेहरबानी दिखाना शुरू कर दिया।

इस तरह दिया कारनामे को अंजाम
बीएसपी सरकार में तगड़ी पैठ रखने वाले यादव सिंह का अथॉरिटी में भी काफी रूतबा था। उस दौरान नोएडा के सारे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट यादव सिंह की देखरेख में होते थे। यादव ने दिसंबर 2011 के दौरान 954 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ सिर्फ आठ दिन में ही करार कर लिया था। कई कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव तैयार होने से पहले ही टेंडर निकाल दिया। कई कंपनियों को तो बिना टेंडर के ही काम दे दिया। इसके अलावा प्रोजेक्ट का आधे से ज्यादा काम कंपनियों के साथ बिना एग्रीमेंट साइन किए ही कर लिया गया। कंस्ट्रक्शन कंपनियों को ज्यादा पेमेंट किए जाने की वजह से अथॉरिटी को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
 

दो साल गायब फिर बना चीफ इंजीनियर
तमाम आर्थिक अनियमितताओं के चलते यादव सिंह को जून 2012 में निलंबित किया गया था। सैकड़ों करोड़ रुपये के आरोपों से घिरने के बाद यादव सिंह पूरे दो साल गायब रहा। तभी उसके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। इन सबके बावजूद यादव सिंह को नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण का चीफ इंजीनियर बनाया गया। दो साल तक गायब रहने के दौरान यादव सिंह ने गैरहाजिरी का कोई मेडिकल या अन्य पेपर भी जमा नहीं किया। इसके बावजूद पदोन्नति देकर मलाईदार पर पोस्टिंग की गई। पोस्टिंग के आधार पर यादव सिंह को चीफ इंजीनियर सेकंड का पद मिला है, लेकिन यादव चीफ इंजीनियर के नाम से आदेश जारी कर रहा है।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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