तीन उग्रवादी संगठनों ने ली मणिपुर हमले की जिम्मेदारी, सेना प्रमुख ने स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की

By Lalit Fulara | Last Updated: Friday, June 5, 2015 - 17:44
तीन उग्रवादी संगठनों ने ली मणिपुर हमले की जिम्मेदारी, सेना प्रमुख ने स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की

नई दिल्ली : मणिपुर के चंडेल जिले में गुरुवार को उग्रवादियों ने भारतीय सेना के 6 डोगरा रेजिमेंट पर घात लगाकर हमला किया। इस उग्रवादी हमले में 18 जवान शहीद हो गए हैं। जबकि 11 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड-खपलांग (NSCN-K), कांगेली येवोल कन्ना लूप (KYKL) और कांगलेपाक कम्यूनिस्ट पार्टी (KCP) ने संयुक्त रूप से हमले की ज़िम्मेदारी ली है। 

लाइव अपडेट

-आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग इंफाल पहुंच गए हैं। यहां वो गुरुवार को हुए उग्रवादी हमले की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुातबिक, सेना प्रमुख शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी देंगे।

-प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मणिपुर हमले की स्थिति पर चर्चा के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मणिपुर के लिए अधिक से अधिक सहायता और सुरक्षा फोर्स भेजने के निर्देश दिए हैं।

 

-न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उग्रवादी हमले में शहीद हुए 18 सेना के जवानों में- 6 जम्मू-कश्मीर, 7 हिमाचल प्रदेश, 2 उत्तर प्रदेश और एक-एक पंजाब, मध्य प्रदेश और केरल के रहने वाले हैं।

-आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग हालात का जायजा लेने के लिए इंफाल पहुंचे हैं।

इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के उग्रवादियों से कड़ाई से निपटने का आदेश दिया।  रिपोर्टों के मुताबिक केंद्र सरकार ने सेना से कहा है कि वह पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों-एनएससीएन (के) और अन्य उग्रवादियों समूहों के खिलाफ 'तलाशी और नष्ट' अभियान शुरू करे। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने सेना से हाल कि दिनों में हिंसा में संलिप्त आतंकवादी समूहों को कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि सेना पर हुआ यह हमला पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा आंतकी हमला है।

आतंकी एवं उग्रवादी समूहों से कड़ाई से निपटने का निर्णय एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। राजनाथ सिंह ने निर्देश दिया कि हमले में शामिल किसी उग्रवादी को खुला नहीं घूमने देना चाहिए और इस हमले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ यथासंभव कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। रक्षा सूत्रों ने कहा कि सेना पर पिछले दो दशक में हुआ यह सबसे भयावह हमला है।

सेना के प्रवक्ता कर्नल रोहन आनंद ने दिल्ली में बताया, ‘हमले में 18 सैन्यकर्मी मारे गये और 11 घायल हो गये।’ पहले आनंद ने मरने वालों की संख्या 20 बताई थी। पुलिस ने बताया कि एक संदिग्ध उग्रवादी भी मारा गया है। हमला गुरुवार सुबह नौ बजे के आसपास तब हुआ जब गश्ती दल पारालोंग और चारोंग गांवों के बीच में एक स्थान पर पहुंचा था। मणिपुर के गृह सचिव जे. सुरेश बाबू ने कहा, ‘यह काम पीएलए का लगता है जिसमें ‘केवाईकेएल’ संगठन की ओर से मदद मिलने का भी संदेह है। हम अभी और जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।’ हालांकि सेना का मानना है कि हमले में केवाईकेएल का हाथ है।

सेना के अनुसार हमले का स्थान भारत-म्यामां सीमा से करीब 15-20 किलोमीटर दूर है। रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस कायराना कृत्य को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

एक पुलिस अधिकारी ने यहां बताया कि 6 डोगरा रेजीमेंट का एक दल इंफाल से लगभग 80 किलोमीटर दूर तेंगनोपाल-न्यू समतल रोड पर सामान्य दिनों की तरह रोड ओपनिंग पेट्रोल (आरओपी) पर था। उसी समय एक अज्ञात उग्रवादी संगठन ने घात लगाकर शक्तिशाली देसी बम (आईईडी) से दल पर हमला कर दिया।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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