रसगुल्ला के उद्भव को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल आमने-सामने

Last Updated: Saturday, September 19, 2015 - 22:03
रसगुल्ला के उद्भव को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल आमने-सामने

भुवनेश्वर : दुनिया को रसगुल्ले की मीठी और रसीली सौगात किसने दी, इस बात को लेकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच चल रही कसैली और रूखी लड़ाई में शनिवार को एक नया मोड़ आया, जब ओडिशा सरकार ने इस संबंध में तीन समितियों का गठन करने का निर्णय लिया।

विज्ञान-तकनीक एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रदीप पाणिग्रही ने कहा कि सरकार तीन समितियां गठित करेगी जो रसगुल्ले से जुड़े मामलों को देखेंगी। इन समितियों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग और संस्कृति विभाग से सदस्यों को लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पहली समिति ओडिशा में रसगुल्ला के उद्भव (origin) से जुड़े तथ्यों और सबूतों को देखेगी। दूसरी समिति उस आधार का अध्ययन करेगी जिसपर पश्चिम बंगाल रसगुल्ले पर अपना दावा कर रहा है। तीसरी समिति ओडिशा के दावे को स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाएगी।

मंत्री ने कहा कि समितियां एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दे देंगी।

रसगुल्ला के जन्म को लेकर दोनों राज्यों के बीच पिछले कुछ समय से जंग छिड़ी हुई है। पश्चिम बंगाल का दावा है कि कलकत्ता के नबीन चंद्र दास ने इस मिठाई को खोजा जबकि ओडिशा का कहना है कि यह 13वीं सदी से पुरी के मंदिर में बनाया जा रहा है।

वैसे बनाया चाहे किसी ने भी हो, इस बात में दो राय नहीं कि मुंह में रखते ही मन और आत्मा को मिठास से भर देने वाले नरम, सफेद और मुलायम रसगुल्ले को पसंद करने वाले दुनियाभर में हैं और उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका ईजाद कहां हुआ।

भाषा



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