मोदी गरीबों की नहीं 'सूट-बूट' की सरकार है: राहुल

Last Updated: Saturday, September 19, 2015 - 18:53
मोदी गरीबों की नहीं 'सूट-बूट' की सरकार है: राहुल

पटना : कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर निशाना साधा। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में  चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए राहुल ने कहा कि यह गरीबों की नहीं, 'सूट-बूट' की सरकार है। राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी जी को अगर रोजगार की बात करनी है तो वे युवाओं और मजदूर वर्ग से जाकर बात करें।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आगे कहा, 'मोदी जी पहले चाय वाले थे और आहिस्‍ते-आहिस्‍ते उनके कपड़े बेहतर होते गए। जब वे प्रधानमंत्री बने तो उन्‍होंने 15 लाख का सूट पहन लिया। पीएम मोदी गरीबों से नहीं, बल्कि सूट-बूट वालों से मिलते हैं।'

उन्‍होंने कहा, 'मोदी सरकार आपसे जमीन छीनकर आपको रोजगार देना चाहती है। एक साल पूरा होने पर भी मोदी सरकार ने किसी को रोजगार नहीं दिया।' उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री रमन सिंह, शिवराज सिंह और वसुंधरा राजे के अलावा सुषमा स्‍वराज पर भी सवाल उठाए। राहुल ने कहा 'हमने महागठबंधन इसलिए बनाया ताकि सूट-बूट वाले लोगों और इनकी सरकार से बिहार की जनता को बचाया जा सके। यहां बीजेपी की सरकार आने पर दिल्‍ली और गुजरात से सूट-बूट वाले आकर लोगों से उनकी जमीनों को छीनेंगे।'

राहुल गांधी ने घोषणा करते हुए कहा कि 'हम युवाओं को पढ़ाई के लिए चार लाख रुपये देंगे।' उन्‍होंने कहा, 'आरएसएस और बीजेपी के लोग गरीब को अज्ञानी समझते हैं। बीजेपी वाले गरीबों से गले नहीं मिलना चाहते ताकि इनके सूट-बूट गंदे न हों।'

रैली में मंच पर राहुल के साथ पूर्व लोकसभा अध्‍यक्ष मीरा कुमार, जदयू सांसद केसी त्‍यागी और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्‍वी यादव भी मौजूद थे।

पश्चिमी चंपारण में रैली स्‍थल पर पहुंचने से पहले राहुल पटना पहुंचे। यहां पटना में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया, जिसके बाद राहुल गांधी पश्चिमी चंपारण के लिए रवाना हुए। इस रैली में पूरी तरह से वन मैन शो देखने को मिला, क्योंकि महागठबंधन में कांग्रेस के साथी नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव इस रैली में शामिल नहीं हुए।

लालू और नीतीश की राहुल की रैली में अनुपस्थिति पर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने सफ़ाई देते हुए कहा 'वे दोनों टिकट बंटवारे के काम में व्यस्त हैं इसलिए रैली में नहीं आ पा रहे हैं। इसका कोई और राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।'

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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