परेशानी में ईरानीः फर्जी शैक्षणिक जानकारी केस को कोर्ट ने सुनवाई लायक करार दिया

By Pritesh Gupta | Last Updated: Wednesday, June 24, 2015 - 15:43
परेशानी में ईरानीः फर्जी शैक्षणिक जानकारी केस को कोर्ट ने सुनवाई लायक करार दिया
File Photo

नई दिल्ली: फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों और जानकारियों को लेकर राजनेताओं के फंसने का सिलसिला जारी है। सीनियर बीजेपी नेता और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनाव आयोग को दिये गए शपथ पत्रों में अलग-अलग जानकारी दिये जाने को लेकर लगी याचिका को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनवाई के लायक करार दिया है। इससे स्मृति की मुसीबत बढ़ गई है।

स्मृति के खिलाफ कथित तौर पर अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत सूचना देने संबंधी शिकायत पर संज्ञान ले लिया। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने शिकायत पर संज्ञान लिया और इस मामले में समन करने से पूर्व गवाही दर्ज कराने के लिए 28 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘यह व्यवस्था दी जाती है कि इस मामले में वर्तमान शिकायत मियाद के अंदर ही दायर की गई है। इस पर संज्ञान लिया जाता है। इस मामले में समन से पूर्व गवाही दर्ज कराने के लिए अब यह मामला 28 तारीख के लिए निर्धारित किया जाता है।’ 

स्वतंत्र पत्रकार अहमर खान ने अपनी शिकायत में केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि ईरानी ने लोकसभा और राज्यसभा की उम्मीदवारी के दौरान नामांकन भरते समय चुनाव आयोग के समक्ष तीन हलफनामों में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग-अलग ब्यौरा दिया है। याचिका के मुताबिक अप्रैल 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए अपने हलफनामे में कहा था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ कॉ़रसपॉन्डेंस से बीए किया है, जबकि 11 जुलाई 2011 को गुजरात से राज्यसभा चुनाव के लिए एक अन्य हलफनामे में उन्होंने कहा कि उनकी सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता डीयू के स्कूल ऑफ कॉ़रसपॉन्डेंस से बीकॉम पार्ट-वन है।

याचिकाकर्ता ने शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 16 अप्रैल 2014 को उत्तरप्रदेश की अमेठी सीट से लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन के संबंध में अपने हलफनामे में स्मृति ईरानी ने कहा था कि उन्होंने डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बैचलर ऑफ कॉमर्स पार्ट- 1 पूरा किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि स्मृति ईरानी द्वारा पेश हलफनामे की विषयवस्तु से स्पष्ट है कि उनकी ओर से शैक्षणिक योग्यता के बारे में केवल एक शपथ ही सही है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

शिकायत में दावा किया गया है, ‘स्मृति ईरानी के उक्त हलफनामों में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत और अलग-अलग बयान दिया, ऐसा प्रतीत होता है कि अपने स्वामित्व की अचल संपत्ति एवं अन्य जानकारियों के बारे में गलत या अलग-अलग बयान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है, ‘उपरोक्त तथ्य और परिस्थितियां आरोपी की ओर से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125-ए के तहत अपराध है, साथ ही अतिरिक्त जांच के परिणामस्वरूप अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत अपराध हो सकता है।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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