अमेठी फूड पार्क पर केंद्र का जवाब, बताई परियोजना रद्द होने की वजह

Last Updated: Tuesday, May 12, 2015 - 18:11
अमेठी फूड पार्क पर केंद्र का जवाब, बताई परियोजना रद्द होने की वजह

नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में प्रस्तावित फूड पार्क को रद्द करने के पीछे राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाए जाने के कुछ दिन बाद मंगलवार को सरकार ने लोकसभा में बताया कि प्रमोटर कंपनी के मंजूरी संबंधी जरूरी शर्तों का अनुपालन करने में विफल रहने के कारण परियोजना रद्द हुई है।

कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के बीच केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने सदन में एक विस्तृत बयान में कहा कि फूड पार्क की प्रमोटर कंपनी ने प्राकृतिक गैस की उपलब्धता नहीं होने के कारण परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जाहिर की थी। आगे उन्होंने बताया कि प्राकृतिक गैस के आवंटन से पिछली सरकार ने इनकार किया था। यह मुद्दा अमेठी में प्रस्तावित शक्तिमान मैगा फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड को रद्द किए जाने से जुड़ा था।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर पिछले सप्ताह सरकार पर हमला बोला था और साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया था। खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर ने कहा कि अंतिम मंजूरी के लिए प्रोमोटर कंपनी द्वारा ‘पूर्व शर्तों’ का अनुपालन करने में अनावश्यक देरी के कारण परियोजना को दी गई सिद्धांतत: मंजूरी को रद्द कर दिया गया। उन्होंने बताया कि परियोजना को रद्द किए जाने संबंधी फैसले की सूचना 11 जुलाई 2014 को प्रमोटर कंपनी को दे दी गई थी।

हरसिमरत कौर ने कहा कि एक अंतरमंत्री स्तरीय अनुमोदन समिति ने 30 जून 2014 को परियोजना में हुई अनावश्यक देरी के मुद्दे पर विचार किया और उसके बाद सैद्धांतिक मंजूरी को रद्द कर दिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जून में परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए हुई समीक्षा बैठक के दौरान प्रमोटर कंपनी के प्रतिनिधि ने सूचित किया था कि प्रशासित मूल्य पर गैस आपूर्ति के बिना वह ‘परियोजना को व्यवहार्य नहीं पाती।’

मंत्री ने बताया, ‘प्रशासित मूल्य पर गैस की उपलब्धता नहीं होने पर प्रमोटर कंपनी ने परियोजना को आगे बढ़ाने में अपनी असमर्थता जतायी थी।’ उनके अनुसार, प्रमोटर कंपनी ने 26 जून 2014 को एक पत्र के जरिए सूचित किया था कि उसने अभी तक जरूरी भूमि को अधिग्रहित नहीं किया है क्योंकि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के दिशा निर्देशों में बदलाव का मामला अभी विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि इसके बाद प्रमोटर कंपनी ने 30 सितंबर 2014 तक समय बढ़ाए जाने की मांग की थी।

भाषा



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