BSNL में सुधार की मांग तेज, हड़ताल पर ढाई लाख कर्मचारी

By Pritesh Gupta | Last Updated: Wednesday, April 22, 2015 - 20:23
BSNL में सुधार की मांग तेज, हड़ताल पर ढाई लाख कर्मचारी

नोएडाः देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक दूरसंचार कंपनी BSNL को घाटे से उबारने और नीतियों में सुधार की मांग कर रहे कंपनी के करीब ढाई लाख कर्मचारी अब हड़ताल पर चले गए हैं। नोएडा, गाज़ियाबाद, इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ, बुलंदशहर, आगरा और गोरखपुर समेत कई जगहों पर कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

दो दिनों की इस हड़ताल की वजह निगम का घाटा और सर्विसेज को लेकर कथित तौर पर सरकार का लापरवाह रवैया है। जिस कंपनी के पास देश में सबसे बड़ा नेटवर्क और सबसे ज्यादा हाईटेक मशीनरी से लैस BSNL की हालत इतनी खस्ता क्यों है? इलाहाबाद में BSNL उपभोक्ताओं की शिकायत तक सुनने वाला कोई नहीं है। शिकायत के लिए जो हेल्पलाइन है वो कोई उठाता ही नहीं। सबसे ज्यादा दिक्कत ब्रॉडबैंड सेवाओं में है। जिसमें 3जी के भुगतान में 2जी से भी धीमी सेवा का आरोप उपभोक्ता लगाते हैं।

BSNL के उपभोक्ता भी संतुष्ट नहीं हैं। सान 2000 में 40 हजार करोड़ रुपये के साथ शुरु हुई BSNL की हालत बाजार में कॉम्पीटिशन बढ़ने के साथ ही खराब होती चली गई। इसके पीछे BSNL के अधिकारियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच सांठगांठ को भी वजह माना गया है। आरोपों के मुताबिक BSNL के बड़े अधिकारी जानबूझकर सर्विस को खराब रखते हैं, जिसके बदले उन्हें प्राइवेट कंपनियों से मोटी रकम और रिटायरमेंट प्लान की गारंटी मिलती है। मौजूदा वक्त में BSNL के कई पूर्व अधिकारी और कर्मचारी प्राइवेट कंपनियों में मलाईदार पदों पर बैठे मोटी तनख्वाह उठा रहे हैं।

नोएडा में BSNL के ऑफिस के बाहर खुलेआम लगी कैनोपीज़ कंपनी के कर्मचारियों और प्राइवेट कंपनियों के एजेंट्स के बीच साठगांठ को साबित करते हैं। यहां खुलेआम प्राइवेट कंपनियों के स्टाल आपको मिल जाएंगे। हालत ये है कि BSNL के भीतर लगे भ्रष्टाचार के दीमक ने इस सरकारी दूरसंचार कंपनी को खोखला कर दिया है। छह हजार करोड़ के भारी घाटे और स्टाफ की कमी के चलते सर्विस बेहाल है और उपभोक्ता BSNL से पोर्ट कर प्राइवेट कंपनियों की ओर रूख कर रहे हैं। तमाम संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी सरकारी कंपनी को चलाने के लिए ना तो कोई सही नीति नजर आती है और ना ही इसके नुमाइंदों की नीयत ठीक दिखती है।

मेरठ और बुलंदशहर जैसे शहरों में BSNL की सेवाओं से खासे नाराज लोगों ने अपने लैंडलाइन फोन कटवा लिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से ना तो वक्त पर जरूरी उपकरण मुहैया कराए जाते हैं और ना ही देहात क्षेत्रों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी मिल पा रही है, जिसका असर सेवाओं पर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की शिकायत रहती है कि कोई दिक्कत होने के बाद अगर विभाग में शिकायत की जाती है तो महीनों कोई पूछने भी नहीं आता। विभाग के अधिकारी भी दबी जुबान मानते हैं कि फैसले लेने में सुस्ती ने विभाग का बंटाधार कर दिया है।
 
वहीं प्रदेश की राजधानी में BSNL के खराब नेटवर्क से परेशान उपभोक्ता भी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं का रूख कर रहे हैं। वहीं BSNL के अधिकारी घाटे का ठीकरा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों पर फोड़ रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक BSNL के पिछड़ने की वजह उसका कमजोर प्रचार तंत्र है।

यूपी BSNL यूनियन के अध्यक्ष डीएन त्रिपाठी की मानें तो देश में अब तक जितने भी दूरसंचार मंत्री रहे हैं उन्होंने BSNL को चारागाह की तरह इस्तेमाल किया है और जानबूझकर ऐसी नीतियां बनाई हैं ताकि प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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