यादव सिंह केस में नूतन ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई कैवियेट

Last Updated: Thursday, July 30, 2015 - 00:53
यादव सिंह केस में नूतन ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई कैवियेट
File Photo

लखनऊ: नोएडा प्राधिकरण के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह के भ्रष्टाचार मामले की सीबीआई जांच के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उप्र सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर किये जाने की तैयारी सम्बन्धी अटकलों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने आज इसी मामले में शीर्ष अदालत में कैवियेट दाखिल की।

नूतन ने यहां इस आशय की जानकारी देते हुए कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश सरकार अरबों के घोटाले के आरोपी यादव सिंह को बचाने की भरसक कोशिश कर रही है। इससे जाहिर होता है कि सिंह से संबंधित इस मामले में राज्य सरकार के शीर्ष नेता भी कथित रूप से शामिल हैं, जो सीबीआई की जांच से डर रहे हैं।

नूतन ने अपनी कैवियेट में न्यायालय से प्रार्थना की है कि यादव सिंह भ्रष्टाचार प्रकरण की सीबीआई जांच कराने के गत 16 जुलाई के उच्च न्यायालय की लखनउ पीठ के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार या नोएडा प्राधिकरण अथवा खुद यादव सिंह द्वारा दायर की जाने वाली किसी भी याचिका पर फैसला सुनाने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है।

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति एस. एन. शुक्ला की पीठ ने नूतन ठाकुर की याचिका पर गत 16 जुलाई को यादव सिंह भ्रष्टाचार प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिये थे। सिंह से जुड़े लोगों को भी जांच के दायरे में लाने को कहा गया था।

काले धन को लेकर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने भी यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की थी। एसआईटी ने परोक्ष रूप से प्रदेश की सपा सरकार पर सिंह के खिलाफ समुचित कार्रवाई ना करने का आरोप भी लगाया था। राज्य सरकार ने उस वक्त भी प्रकरण की सीबीआई जांच का यह कहते हुए विरोध किया था उसने यादव सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिये एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। हालांकि न्यायालय ने कहा था कि उसे एकल सदस्यीय ए. एन. वर्मा आयोग पर विश्वास नहीं है।

पिछले साल 27 और 28 नवम्बर को नोएडा विकास प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता की कंपनी के साझेदारों और एक अन्य कंपनी के यहां पडे आयकर छापों में साढे दस करोड रूपये से अधिक नकद और दो किलो सोने एवं हीरे के आभूषण बरामद हुए थे। कुसुमलता के घर पर छापे के दौरान 12 लाख रूपये नकद और दो किलो सोने एवं हीरे के आभूषण बरामद हुए थे। कुसुमलता मीनू क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं। मीनू क्रिएशन्स के ही एक अन्य निदेशक अनिल पेशावरी के यहां छापे में 44 लाख रूपये नकद बरामद किये गये थे। छापों के दौरान 14 लाकर बरामद किये गये थे। आयकर विभाग की 20 टीमों ने दोनों कंपनियों के दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में कार्यालय परिसरों और इन कंपनियों के निदेशकों के आवासीय परिसरों पर छापे मारे थे।

इन कंपनियों पर मुख्य आरोप है कि प्रापर्टी के काम में इन कंपनियों ने कोलकाता से बोगस शेयर होल्डिंग बनाकर 30 से 40 कंपनियों के जरिए नोएडा विकास प्राधिकरण से अपने नाम भूखंड आवंटित कराये और फिर इन कंपनियों के शेयर बेच दिये। इस प्रकार शेयर खरीदने वाले पक्ष को इन कंपनियों के खरीदे भूखंड मिल गये। ये सभी सौदे पिछले तीन से चार साल के दौरान हुए थे, इस प्रकार कर की चोरी हुई थी। इस छापामार कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने यादव सिंह के पास करीब 900 करोड़ रपये की सम्पत्ति होने का अनुमान लगाया था।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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