यादव सिंह केसः खुद ने लूटा रिश्तेदारों में भी लुटाया, बौखलाए भाई ने तोड़े मीडियाकर्मियों के कैमरे

Last Updated: Thursday, December 4, 2014 - 16:11
यादव सिंह केसः खुद ने लूटा रिश्तेदारों में भी लुटाया, बौखलाए भाई ने तोड़े मीडियाकर्मियों के कैमरे

नोएडाः लूट के कुख्यात सम्राट यादव सिंह के लॉकर्स जैसे-जैसे खुल रहे हैं, नए खुलासे हो रहे हैं। बुधवार को बैंकों की हड़ताल होने की वजह से लॉ़कर नहीं खोले जा सके थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जांच पूरी होते ही यादव सिंह की करतूतों की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार को देगा।

बौखला गए यादव समर्थक
जैसे-जैसे ऊंट (यादव सिंह) पहाड़ के नीचे आ रहा है, वैसे-वैसे करीबियों की बैचेनी बढ़ती जा रही है। इस बैचेनी से बौखलाए यादव सिंह के भाई कपूर चंद्र ने मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट की और उनके कैमरे छीनने की कोशिश की है। घटना आगरा के देवरी रोड स्थित कपूर के घर की है। मामले में कपूर चंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

रिश्तेदार भी निहाल हो गए यादव राज में
काली कमाई से अरबों की संपत्ति बनाने वाले यादव सिंह के रिश्तेदार भी करोड़ों के मालिक हैं। यादव सिंह के समधी प्रवेंद्र कुमार और उनके भाइयों की अलीगढ़ में आलीशान कोठियां बना रखी है। इन्हीं रिश्तेदारों ने अलीगढ़ के इग्लास और कोल तहसील में सैकड़ों बीघा जमीन पर कॉलोनी बनाई है। प्रवेंद्र सिंह के भाई के पास अलीगढ़ में ली-ग्रैंड नाम से एक फार्म हाउस भी है।

         यूपी का इंडस्ट्रीयल हब और इनवेस्टमेंट सिटी के तौर पर बस रहे नोएडा को पूरी योजना के तहत बसाया गया है। शहर को विकसित करने के लिए अथॉरिटी ने किसानों की जमीन अधिग्रहित की है। लेकिन जल्द ही विकास का ये पूरा प्लान लूट की साजिश में तब्दील हो गया। विकास की ओर अग्रसर होते कदमों ने धीरे-धीरे दिशा बदल ली और राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और इंजीनियर्स की मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए फर्जी तरीकों से जमीन हासिल करने, ब्लैक मनी इनवेस्टमेंट करने और सरकारी नौकरियों में अपनों को तवज्जो दिलाने का मौका बन गया।

लंबी अथॉरिटी का कबाड़ा करने वालों की फेहरिस्त
इससे पहले भी कई घोटालेबाजों ने नोएडा में कारनामों को अंजाम दिया है। 1971 बैच की IAS रही नीरा यादव को 1997 में IAS असोसिएशन ने मोस्ट करप्टेड IAS चुना था। नीरा ऐसी पहली मुख्य सचिव थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव पद से हटाने को कहा था। CBI ने नीरा यादव पर 1994 में नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रहते हुए IAS राजीव कुमार और अनपी दोनों बेटियों के नाम नियमों को ताक पर रखकर भू-खंड आवंटन का आरोप लगा है। नीरा यादव को सीबीआई की अदालत ने एक अन्य भू-खंड के मामले में 2010 में चार साल की सजा सुनाई थी।

इसी तरह 1983 बैच के IAS अधिकारी राजीव कुमार नोएडा प्लॉट आवंटन मामले में नीरा यादव के साथ आरोपी थे। नीरा यादव जब अथॉरिटी की चेयरपर्सन थी, तब राजीव कुमार उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी था। 1983 बैच के ही IAS अधिकारी संजीव शरण पर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ रहते होटलों के लिए जमीन आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगा था। हाई कोर्ट ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसकी रोक लगा रखी थी। संजीव शरण को अवस्थापना और औद्योगिक का प्रमुख सचिव बना रखा है।

इन अधिकारियों की फेहरिस्त जरा लंबी है। 1979 बैच के IAS अधिकारी राकेश बहादुर पर भी हजारों करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। तब मायावती सरकार ने राकेश बहादुर को निलंबित कर दिया था।

 

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