फिर पटरी पर आई चारधाम यात्रा, मेजबानों के चेहरे पर छाई खुशी

By Pritesh Gupta | Last Updated: Monday, May 25, 2015 - 18:56
फिर पटरी पर आई चारधाम यात्रा, मेजबानों के चेहरे पर छाई खुशी

देहरादूनः दो साल पहले आई भयंकर हिमालयी आपदा ने चार धाम यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया था, लेकिन इस बार फिर से चारधाम यात्रा के पुराने दिन लौट आए हैं। बीते एक माह में पर्यटन ने प्रदेश को पटरी पर लाने की कोशिश में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बाढ़ और भू-स्खलन के बाद तमाम आशंकाओं के बीच शुरू हुई चारधाम ने इस बार सभी अटकलों को बेमानी साबित कर दिया है। बीते सीजन में एक साल में जितने यात्री पहुंचे थे, उतने इस बार एक माह में पहुंच चुके हैं।

दरअसल, चारधाम यात्रा को उत्तराखंड के पर्यटन व्यवसाय की रीढ़ माना जाता है। 2013 की आपदा के बाद यात्रा चौपट होने से हजारों लोगों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। वहीं इस साल भी सीजन की शुरुआत से पहले ही लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर पंडा-पुरोहितों से लेकर पर्यटन व्यापारियों को नाउम्मीद कर दिया था। लेकिन जबरदस्त प्रचार, युद्धस्तर पर हुए काम के बाद बदली सड़कों और व्यवस्थाओं की हालत ने एक बार फिर यात्रा को पटरी पर ला दिया है।

88 ऐसे कारोबार हैं जो सीधे तौर पर चारधाम यात्रा से जुड़े हुए हैं। इससे 4 लाख 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, वहीं 17 लाख 60 हजार लोग अप्रत्यक्ष रूप से यात्रा से संबंध रखते हैं इतना ही नहीं चारधाम यात्रा आने वाले यात्री उत्तराखंड को ही नहीं बल्कि कई प्रदेशों की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण अंग है।

बहरहाल, आपदा से उबर रहे उत्तराखंड के लिए यात्रा की यह सफलता किसी संजीवनी से कम नहीं है। बावजूद इसके असली परीक्षा अभी पास करनी बाकी है, क्योंकि जब बरसात चरम पर होगी और देश-दुनिया के यात्री उत्तराखंड में होंगे, तब दरकते पहाड़ों और बहते नालों के बीच यात्रा का सकुशल संचालन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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