उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ ज़ी संगम की मुहिम

By pranav purushottam | Last Updated: Saturday, May 30, 2015 - 12:43
उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ ज़ी संगम की मुहिम

हरिद्वार: देवभूमि उत्तराखंड में अवैध खनन का धंधा जोरों पर है। अवैध खनन से जहां एक ओर गंगा की दिशा बदल रही है वहीं पहाड़ खोखले होते जा रहे हैं। एनजीटी द्वारा अप्रैल 2015 में पूर्णतः प्रतिबंधित करने के बावजूद अवैध खनन का कारोबार निरंतर जारी है। दिनदहाड़े गंगा के तटों को खोदा जा रहा है और रात में रेत-बजरी से भरे ट्रक हर बैरियर से पार हो रहे हैं।

वर्ष 2012 में इको सेंसेटिव जोन की अधिसूचना जारी होने के बाद प्रशासन की ओर से सभी खनन और चुगान के पट्टे सीज हैं। इसके बावजूद लाखों टन रेत बजरी और पत्थर जैसा उपखनिज रोजाना अवैध तरीके से खोदकर उठाया जा रहा है। इससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

सूबे की गोला, दाबका, कोसी, कैलाश, रामगंगा, सरयू, शारदा, चन्द्रभागा, टोंस, आसन, बिंदाल जैसी दर्जनों छोटी नदियों पर अवैध खनन चल रहा है। मनेरा के अलावा गंगोरी, उजेली, गंगा विहार और तिलोथ में भी गंगा के तटों से बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है। इंद्रावती का तटवर्ती इलाका और पुलिस लाइन के निकट भी भागीरथी के तटों पर काफी खुदाई हो चुकी है। अवैध और अवैज्ञानिक तरीके से खनन का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस स्थिति के कारण तटीय इलाकों में खोदी गई जमीन भविष्य में भू-कटाव के बड़े खतरे को न्यौता दे रही है। इसके लिए एसडीएम के नेतृत्व में कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।

प्रदेश भर में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की बात होती रही है लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। पुलिस द्वारा भी खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसआईटी का गठन तो किया गया था लेकिन फिर भी खनन माफिया सक्रिय है। उत्तराखंड के लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा खनन को लेकर कोई ठोस नीति बनाई जानी चाहिए ताकि प्रदेश के वातावरण के साथ-साथ खनन माफियाओं पर लगाम लग सके और प्रदेश की नदियों से निकलने वाले खनिज का लाभ जनता को भी कम दामों में मिल सके।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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