मिशन-2017 के लिए नए अध्यक्ष की तलाश में बीजेपी

By pranav purushottam | Last Updated: Sunday, May 31, 2015 - 18:29
मिशन-2017 के लिए नए अध्यक्ष की तलाश में बीजेपी

देहरादून: उत्तराखंड बीजेपी में अध्यक्ष के चुनाव में करीब 4-5 महीने का वक्त है लेकिन पद को लेकर घमासान शुरू हो चुका है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का कार्यकाल अक्टूबर 2015 में समाप्त हो रहा है और 2017 विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के किसी नए धुरंधर नेता को अध्यक्ष बनाने की जरुरत प्रदेश बीजेपी महसूस करने लगी है। 

बीते डेढ़ दशक में प्रदेश बीजेपी में छह अध्यक्ष बदले जा चुके हैं। वर्ष 2000 में पूरनचन्द्र शर्मा से लेकर मनोहरकांत ध्यानी और भगत दा के बाद जाकर बीजेपी को पांच साल के लिए सत्ता मिली थी। वहीं बच्ची दा और बिशन सिंह चुफाल के अध्यक्ष रहते हुए बीजेपी संगठन ने सत्ता सुख भोगा, लेकिन बिशन सिंह की विदाई के साथ-साथ सत्ता भी गई और नए अध्यक्ष के रूप में अक्टूबर 2012 में तीरथ सिंह रावत की ताजपोशी हुई।

2014 में पहली बार बीजेपी अपने दम पर देश की सत्ता पर काबिज हुई। लेकिन पूरे देश में जमकर चल रही मोदी लहर के बावजूद उत्तराखंड में पंचायत चुनावों से लेकर चार विधानसभा सीटों पर उपचुनावों तक बीजेपी को हार का सामना पड़ा है, जिसके चलते तीरथ सिंह की नेतृत्व क्षमता पर उंगलियां उठना शुरू हो गई हैं। अब एक बार फिर तीरथ सिंह को समय से पूर्व बदले जाने की चर्चाएं जोरों पर है। 

कांग्रेस नेताओं की मानें तो 2017 से कांग्रेस की कमान हरीश रावत के हाथ में है। ऐसे में बीजेपी संगठन को जनाधार वाले नए और धुरंधर राजनैतिक कौशल की जरुरत है, जिसके लिए पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कर सकती है। तीरथ सिंह रावत पास संगठन को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों के अलावा कुछ नहीं दिखता। तीरथ सिंह ने कहा कि प्रदेश में अभी तक सदस्यता अभियान के तहत अब तक 15 लाख से अधिक सदस्य बनाए जा चुके हैं। अब वे केंद्रीय संगठन के महाअभियानों के जरिये पार्टी को जिला, मंडल और बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद में जुटे है। साथ ही उनकी रणनीति केंद्र सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ मौजूदा सूबे की सरकार की विफलताओं को जनता के बीच ले जाने की है। तीरथ ने साफ किया कि हाईकमान की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वे उसे निभाने को तैयार हैं।

हालांकि अभी तक तीरथ सिंह की विदाई के बाद नया अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। क्योंकि चुनौतियां बड़ी है और समय कम। एक तरफ संगठन को एकजुट कर 2017 के लिए तैयार करना है जो हरीश रावत जैसे राजनीति के धुरंधर को कड़ी टक्कर दे सके। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो तीरथ सिंह दुबारा चुने जाने के आसार कम है। नया अध्यक्ष हरीश रावत स्तर का चाहिए। ऐसे में क्षेत्रीय, जातीय समीकरणों को देखते हुए नए अध्यक्ष के दौड़ में त्रिवेन्द्र सिंह रावत, धन सिंह रावत या तेज-तर्रार मदन कौशिक भी हो सकते है। हालांकि जानकार सतपाल महाराज के राजनैतिक कौशल, वक्तव्य शैली और प्रतिद्वंदिता को भी हरीश रावत की टक्कर का मान रहे हैं। वहीं भुवनचंद्र खंडूरी उम्रदराज नेताओं की लिस्ट में शामिल हो चुके हैं। जबकि भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल 'निशंक' इनकी निगाहें पहले ही केंद्रीय सुख-सुविधाओं पर टिके दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में फैसला लेना आसान नहीं होगा।

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