इस देश के वैज्ञानिकों ने किया बुजुर्गों को जवान करने का दावा, जानिए सच्चाई

वैज्ञानिकों ने 64 वर्ष और इससे अधिक उम्र के 35 बुजुर्गों की ह्यूमन क्लॉक को उलट दिया. वैज्ञानिकों ने इन बुजुर्गों के शरीर के उन दो प्रमुख क्षेत्रों में होने वाली प्रक्रियाओं को विपरीत दिशा में मोड़ दिया जो उम्र बढ़ने के साथ निर्बलता और बीमार करने के लिए जिम्मेदार होती हैं.

इस देश के वैज्ञानिकों ने किया बुजुर्गों को जवान करने का दावा, जानिए सच्चाई
प्रतीकात्मक फोटो

तेल अवीव: क्या कोई बूढ़ा व्यक्ति फिर से अपनी जवानी पा सकता है? तो इसका जवाब हां में है क्योंकि इजरायल (Israel) में 'रिसर्च एंड डेवलपमेंड यूनिट' के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने ह्यूमन बॉडी (Human Body) के दो प्रमुख क्षेत्रों में होने वाली प्रक्रियाओं को उलटकर ये मुमकिन कर दिया है.

'जर्नल एजिंग' में प्रकाशित हुए एक नए शोध के मुताबिक, एजिंग समय के साथ मनुष्यों में होती है लेकिन हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (Hyperbaric Oxygen Therapy) के द्वारा इसे जैविक रूप से उलट दिया गया है.

रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट, शमीर मेडिकल सेंटर, इजराइल (Israel) में याफित हचमो के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 64 वर्ष और इससे अधिक उम्र के 35 बुजुर्गों की ह्यूमन क्लॉक को उलट दिया. वैज्ञानिकों ने इन बुजुर्गों के शरीर के उन दो प्रमुख क्षेत्रों में होने वाली प्रक्रियाओं को विपरीत दिशा में मोड़ दिया जो उम्र बढ़ने के साथ निर्बलता और बीमार करने के लिए जिम्मेदार होती हैं.

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दरअसल लोगों की उम्र बढ़ने के साथ गुणसूत्रों (Chromosomes) के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक कैप्स, जिन्हें टेलोमेरेस (Telomerase) कहा जाता है, छोटे हो जाते हैं और डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है. परिणामस्वरूप कोशिकाएं रेप्लिकेट करना बंद कर देती हैं. इस समय सेन्सेंट कोशिकाओं का भी शरीर में निर्माण होता है, जो पुनर्निमाण को रोकती हैं. लेकिन इजरायल के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने इस प्रक्रिया को उलट दिया है.

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आपको बता दें कि एंटी एजिंग रिसर्च का फोकस टेलोमेरेस की लंबाई बढ़ाना और सेन्सेंट कोशिकाओं से छुटकारा पाना है. दवाओं के माध्यम से बुजुर्गों की बॉडी के इन दो क्षेत्रों में काम किया जाता है.

शोध के दौरान एक हाइपरबेरिक चैंबर में 35 बुजुर्गों को बार-बार शुद्ध ऑक्सीजन दी गई, जिससे उनके टेलोमेरेस की लंबाई 20% तक बढ़ गई. वैज्ञानिकों के लिए यह एक ऐसी उपलब्धि है जो इससे पहले कभी हासिल नहीं हुई. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शोध के दौरान परीक्षण के प्रतिभागियों के टेलोमेरेस की वृद्धि उतनी हो गई, जितने वो 25 साल पहले लंबे थे.

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