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Bitcoin: 500 साल पहले भी स्टेटस सिंबल था 'बिटक्वॉइन', ऐसे किया जाता था इस्तेमाल

बिटक्वॉइन (Bitcoin) आज से 500 साल पहले भी चलन में था. दुनिया में एक जगह ऐसी है जहां यह उनके धन की संपन्नता को दर्शाने के लिए बिटक्वॉइन का इस्तेमाल किया जाता था. विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर.

Bitcoin: 500 साल पहले भी स्टेटस सिंबल था 'बिटक्वॉइन', ऐसे किया जाता था इस्तेमाल
Bitcoin

नई दिल्ली: व्यापर जगत में रूचि रखने वालों के लिए आजकल बिटक्वॉइन (Bitcoin) बहुत खास बना हुआ है. कुछ लोगों को इसमें निवेश से बहुत ज्यादा फायदा भी हुआ है और कुछ को उतना ही नुकसान. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय ट्रेंडी बिटक्वॉइन (Bitcoin In India) आज से 500 साल पहले भी चलन में था. दुनिया में एक जगह ऐसी है जहां यह उनके धन की संपन्नता को दर्शाने के लिए बिटक्वॉइन का इस्तेमाल किया जाता था. आइए जानते हैं इस 500 साल पुराने बिटक्वॉइन (Bitcoin Price) के बारे में.

ऐसी होती है बनावट 

यह धनराशि यानी गोल छेद वाले पत्थर पश्चिमी माइक्रोनेसिया के याप द्वीप (Island of Yap) पर चलते हैं. इन्हें राई स्टोन सर्किल (Rai Stone Circle) कहते हैं. इन्हें चूना पत्थर (Limestone) से बनाया जाता है. इस पत्थर की ऊंचाई 12 फीट तक हो सकता है. ये पत्थर छोटे बिस्किट से लेकर बैलगाड़ी के पहियों के आकार तक भी होते हैं.

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स्टेटस सिंबल था बिटक्वॉइन

दरअसल, बिटक्वॉइन उस देश का करेंसी था. ये पत्थर सिर्फ धनराशि के इस्तेमाल के लिए नहीं था इसे सामाजिक मूल्य के तौर पर देखा जाता था. बिटक्वॉइन (Bitcoin Meaning) को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उपहार की तरह दिया जाता था. इसे शादी या वंशानुगत संपत्ति के तौर पर या झगड़े खत्म करने के लिए भी दिया जाता था. या फिर राजनीतिक उपयोग के लिए. हालांकि, इन राई पत्थरों का अब सिर्फ बड़े मौकों पर ही उपयोग होता है. 

होती थी दावेदारी

इन पत्थरों को घरों में या प्रतिष्ठित जगह पर रखा जाता था. मालिकाना हक के लिए पूरे समुदाय को जुबानी बताया जाता था. लोग इसे हमेशा याद रखते थे कि कौन सा राई पत्थर किस व्यक्ति का है. ऐसे में किसी पत्थर पर कोई दूसरा दावा नहीं कर सकता. इनके ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रखने के लिए पब्लिक ट्रांजेक्शन लेजर भी बनाया जाता है जिसमें इनकी कोडिंग होती है. इन्हें ब्लॉकचेन कहते हैं.

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क्या कहते हैं पुरातत्वविद

इस अध्ययन को करने वाले प्रमुख पुरातत्वविद स्कॉट फिट्सपैट्रिक का कहना है कि इतिहास (Bitcoin History) खुद को दोहराता है. बिटक्वॉइन (Bitcoin News) प्रणाली भी इसी मॉडल पर बनी हुई लगती है. फर्क ये है कि बिटक्वॉइन डिजिटल है और यह फिजिकली ट्रांजेक्ट होने वाली राशि थी. यह आज भी याप द्वीप पर बरकरार है और सबसे बड़ा अंतर है सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का. 

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