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शिशुओं को स्तनपान: दक्षिण एशियाई देशों में भारत का स्थान सबसे नीचे

नवजातों एवं शिशुओं को स्तनपान कराने में दक्षिण एशियाई देशों में भारत का स्थान सबसे नीचे है और जन्म के एक घंटे के भीतर केवल 44 प्रतिशत माताएं नवजातों को स्तनपान करा पाती हैं।

शिशुओं को स्तनपान: दक्षिण एशियाई देशों में भारत का स्थान सबसे नीचे

नई दिल्ली  : नवजातों एवं शिशुओं को स्तनपान कराने में दक्षिण एशियाई देशों में भारत का स्थान सबसे नीचे है और जन्म के एक घंटे के भीतर केवल 44 प्रतिशत माताएं नवजातों को स्तनपान करा पाती हैं।

यहां जारी ब्रेस्टफीडिंग प्रोमोशन नेटवर्क आफ इंडिया और पब्लिक हेल्थ रिसोर्स नेटवर्क की चौथी समीक्षा रिपोर्ट ‘अरेस्टेड डेवेलपमेंट’ में कहा गया है कि भारत ने पिछले 11 वर्ष में स्तनपान के चलन को बढ़ावा देने में धीमी प्रगति दर्ज की है।

संगठनों ने स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सरकार के समक्ष सुझाव रखे जिसमें बाल आहार के नियमन को सख्ती से लागू करने के लिए सख्त एवं प्रभावी तंत्र बनाना शामिल है। इन सिफारिशों में नवजात एवं शिशु स्तनपान के लिए राष्ट्रीय नीति, शिशु अनुकूल अस्पताल, मातृत्व सुरक्षा और नौ महीने का मातृत्व अवकाश के प्रावधान वाली नीतियां शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नवजात एवं शिशु स्तनपान संबंधी नीतियों एवं कार्यक्रम तथा इससे जुड़े विषयों के मूल्यांकन में भारत ने 150 में से 78 अंक हासिल किये हैं और साल 2012 की तुलना में इसमें थोड़ा सुधार हुआ है।

बीपीएनआई के मुख्य समन्वयक डा. अरूण गुप्ता ने कहा , ‘ अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों ने इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति दर्ज की है। भारत में इस क्षेत्र में स्थिति कुछ वषरे से स्थिर बनी हुई है।’ उन्होंने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान से नवजात मृत्युदर में 22 प्रतिशत कमी आ सकती है और इससे बच्चों को कई तरह से संक्रमण से सुरक्षा मिलती है। डा. गुप्ता ने कहा कि यह समझ से परे है कि क्यों केवल 44 प्रतिशत महिलाएं नवजात के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान करा पाती हैं।

पीएचआरएन की राष्ट्रीय संयोजक वंदना प्रसाद ने कहा कि बाल आहार का काफी सक्रियता से प्रचार, महिलाओं को घर एवं कार्यस्थन पर सहयोग की कमी, कमजोर नीति एवं कार्यक्रम के कारण स्तनपान को उपयुक्त बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है।

 

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