2 महीने में 14 बार धरती का कंपन किसी बड़े भूकंप का संकेत तो नहीं?

भूकंपीय गतिविधियों के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है.

2 महीने में 14 बार धरती का कंपन किसी बड़े भूकंप का संकेत तो नहीं?

नई दिल्‍ली: आज दोपहर करीब एक बजे दिल्‍ली और आस-पास के इलाके में भूकंप के हल्‍के झटके महसूस किए गए. रिक्‍टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 2.1 आंकी गई.  इससे पहले पिछले दो महीनों में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में करीब 13 बार भूकंप आने से यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह कोई बड़े भूकंप का संकेत तो नहीं है. ऐसे में, विशेषज्ञों ने कहा है कि इस भूकंपीय गतिविधि में कुछ भी असामान्‍य नहीं है. उन्होंने कहा कि भूकंप का पूर्वानुमान करना संभव नहीं है, लेकिन किसी आपात स्थिति से निपटने के लिये एक आपदा प्रबंधन की एक उपयुक्त योजना तैयार रहनी चाहिए.

भूकंपीय गतिविधियों के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है. यहां की धरती में कई ‘फॉल्ट लाइन’ हैं, जो भूकंप उत्पन्न करते हैं. लेकिन यह स्थान अफगानिस्तान में हिंदूकुश पर्वतमाला और यहां तक नेपाल में आने वाले भूकंपों के प्रभावों को भी महसूस करता है.

भारत मौसम विभाग में भूगर्भ विज्ञान एवं भूकंप जोखिम मूल्यांकन केंद्र के प्रमुख ए के शुक्ला के मुताबिक दिल्ली में भूकंप का एक तगड़ा झटका 1720 में आया था, जिसकी तीव्रता 6.5 मापी गई थी. क्षेत्र में अंतिम बार सबसे बड़ा भूकंप 1956 में बुलंदशहर के पास आया था जिसकी तीव्रता 6.7 मापी गई थी.

फॉल्ट लाइन
शुक्ला ने कहा कि हालिया भूकंप कोई असामान्‍य परिघटना नहीं है क्योंकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन की तरह ही कई फॉल्ट लाइन हैं. मथुरा, मुरादाबाद और सोहना में फॉल्ट हैं. दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में दर्ज किये गये सभी 13 भूकंप निम्न से मध्यम तीव्रता के हैं. ये 12 अप्रैल से लेकर तीन जून तक दर्ज किए गए. इनकी तीव्रता 1.8 से लेकर 4.5 (रोहतक में) हैं.

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बेंगलुरु में भूगतिकी (जियोडायनामिक्स) के प्राध्यापक सी पी राजेंद्रन ने कहा कि दिल्ली ने पिछले कुछ समय से 4.5 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप का अब तक सामना नहीं किया है. उन्होंने कहा कि बहुत अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्र, दिल्ली-एनसीआर में बड़ा भूकंप आने की बहुत कम संभावना है. उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का आना कोई नई चीज नहीं है क्योंकि इसके नीचे कई फॉल्ट लाइन हैं. यदि कोई पिछले दो-ढाई महीने में आये भूकंप की पद्धति को देखे तो अधिकतम तीव्रता 29 मई को (रोहतक में) 4.5 रही थी.’’

राजेंद्रन ने कहा, ‘‘ दिल्ली में सैकड़ों किमी लंबी फॉल्ट लाइन नहीं है, जैसा कि हमारे यहां हिमालय पर्वतमाला में है और अपनी भूकंपीय गतिविधियों के लिये जाना जाता है. यहां स्थानीय फॉल्ट लाइन हैं और वे भूकंप के रूप में दबाव को बाहर निकालती हैं.’’

शुक्ला ने कहा कि दिल्ली के आसपास मौजूद फॉल्ट लाइन प्रणाली के तहत शहर में छह से 6.5 की तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है, लेकिन यह सिर्फ स्थानीय प्रणाली की क्षमता को प्रदर्शित करता है. उन्होंने कहा, ‘‘इसका यह मतलब नहीं है कि ऐसा भूकंप तुरंत ही आएगा क्योंकि भूकंप का पूर्वानुमान करने के लिये कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है.’’

सीस्मिक जोन-4 और 5
शहर का ‘सेस्मिक माइक्रोजोनेशन’ करने वाली टीम में शामिल रहे शुक्ला ने कहा कि दिल्ली का 30 प्रतिशत हिस्सा जोन पांच में आता है, जबकि शेष हिस्सा जोन चार में आता है. सेस्मिक माइक्रोजोनेशन भूकंप के खतरे वाले किसी क्षेत्र को विभिन्न जोन में बांटने की प्रकिया है.

समूचे भारत के मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैप के मुताबिक भारतीय मानक ब्यूरो ने पूरे देश को चार बड़े समूह में बांटा है -जोन पांच(अधिक तीव्रता) से लेकर जोन 2 (निम्न तीव्रता) तक.

आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक टी जी सीताराम ने कहा कि मेन बाउंड्री थ्रस्ट (एमबीटी) से दिल्ली तक का निकटतम बिंदु करीब 200 किमी है. एमबीटी, सेनोजोइक काल के दौरान हिमालय पर्वतमाला में हुआ भूगर्भीय बदलाव है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सात की तीव्रता वाले भूकंप की आशंका है. लेकिन किसी भी चीज से इनकार नहीं किया जा सकता. कोई नहीं कह सकता कि यह कब आएगा.’’ वह भी उपरोक्त टीम के सदस्य रहे थे. उन्होंने लोगों को जागरूक करने और एहतियाती उपाय करने पर जोर दिया.

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इंडियन सोसाइटी ऑफ अर्थक्वेक टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष सीताराम ने कहा, ‘‘भूकंप से किसी की जान नहीं जाती, ये इमारतें हैं जो ऐसा करती हैं. इसलिए, समुदाय स्तर पर भूकंप से बचने के बारे में जागरूकता एवं तैयारियों की जरूरत है. यह जरूरी है कि समुदाय को किसी आकस्मिक स्थिति के लिये तैयार किया जाए.

(इनपुट: एजेंसी भाषा)