ESA ने जारी की भविष्य के अभियानों की Themes, अंतरिक्ष में जाने की है जबरदस्त तैयारी

European Space Agency ने भविष्य में अपने अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) की थीम जारी की है जिनसे बड़े ग्रहों के साथ हमारी मिल्की वे (Milky Way) गैलेक्सी का अध्ययन होगा. जानिए और क्या है इस थीम में. 

ESA ने जारी की भविष्य के अभियानों की Themes, अंतरिक्ष में जाने की है जबरदस्त तैयारी
European Space Agency

नई दिल्ली: नासा (NASA) ने शुक्र ग्रह (Venus) के लिए दो अभियानों को स्वीकृत किया लेकिन गुरु और नेप्च्यून (Jupiter and Neptune) के चंद्रमाओं के लिए शुरू होने वाले अभियान को फिलहाल खारिज कर दिया. वहीं अब यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने अपने अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) की थीम जारी की है जिसमें वह साल 2035 से लेकर 2050 के बीच की तैयारियों पर ध्यान देगी. इसमें बड़े ग्रहों के चंद्रमाओं (Moons of Big Giant planets) के साथ बर्फीले चंद्रमा पर लैंडर या ड्रोन भेजने की बात की गई है.

बेहद महत्वपूर्ण अभियान 

इस थीम के दौरान ऐसे अभियान भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे जो हमारी मिल्की वे गैलेक्सी और उनमें मौजूद बाह्यग्रहों को समझने पर केंद्रित होंगे. वहीं शुरुआती ब्रह्माण्ड को समझने के लिए कई जरूरी यान और उपकरण भी भेजे जाएंगे. ठंडी परमाणु इंटरफेरोमैट्री, लंबी दूरी को शक्ति या ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता विकसित करने, और भविष्य के नमूने लाने वाले अभियानों के लिए बर्फ की क्रायोजेनिक नमूने संरक्षित करने की तकनीक पर भी ध्यान दिया जाएगा.

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इस तरह से होंगे विभाजित 

इसके अंतर्गत अगले तीन बड़े स्तर के अभियान, भविष्य के मध्यम स्तर के अभियान और लंबे समय के लिए तकनीकी विकास के लिए अनुशंसा करने पर ध्यान दिया जाएगा. मध्यम स्तर के अभियान में अंतरिक्ष विज्ञान के सभी दायरों को शामिल किया जाएगा जिसमें खगोलविज्ञान, सैद्धांतिक भौतिकी, खगोलमिती भी होगा.

वैज्ञानिक समुदाय का व्यापक स्तर

एसा की ये थीम अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग का संकेत दे रहे हैं जो केवल स्पेस एजेंसी के सहयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शोध और वैज्ञानिक समुदाय के व्यापक स्तर पर होंगे. इनमें अभियानों का चयन उनके प्रस्तावों और आंकलन पर निर्भर करेगा. गौरतलब है कि चुने गए इन विषयों का आंकलन कॉस्मिक विजन साइंस प्रोग्राम के अंतर्गत किया गया था जो अंतिरक्ष अभियानों को नियोजन चक्रों में बांटेंगे. इन्हें वॉयेज 2050 कहा जाता है. ये प्रोग्राम जल्दी ही शुरू होने वाले हैं. 

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