Breaking News
  • गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर की जांच होगी, गोविंदनगर इंस्पेक्टर अनुराग मिश्रा को विवेचक बनाया गया
  • चीन का रॉकेट उड़ान के बाद फेल हुआ, दो सैटेलाइट नष्ट; चीन को करोड़ों रुपयों का नुकसान
  • बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह की खुदकुशी की सीबीआई जांच की मांग की
  • कोरोना: WHO ने धारावी की तारीफ की, 24 घंटे में धारावी में सिर्फ 12 केस

जलवायु परिवर्तन से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

आने वाले समय में स्थिति और भयावह रूप लेने वाली है. खासकर, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ेगा. 

जलवायु परिवर्तन से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
प्रतीकात्मक तस्वीर

सौरभ पांडेय, नई दिल्ली: इस वक्त जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बन गया है. आने वाले समय में स्थिति और भयावह रूप लेने वाली है. खासकर, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ेगा. तापमान बढ़ने से घातक किस्म के बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाएगा. साथ ही खराब फसल की पैदावार के चलते बड़ी संख्या में लोग कुपोषित होंगे. अमेरिका में जलवायु परिवर्तन के खतरों पर तैयार की गई ''द लांसेट काउंटडाउन'' नाम की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.

जलवायु परिवर्तन के खतरों से आगाह करती ''द लांसेट काउंटडाउन'' नाम की इस रिपोर्ट में प्रमुख 5 बिन्दुओं पर ध्यान दिया गया है. जिनमें क्लाइमेट चेंज, प्लानिंग और हेल्थ, इकोनॉमी और फाइनेंस और अंत में पोलिटिकल एंगेजमेंट शामिल हैं. ''द लांसेट काउंटडाउन'' में वर्ल्ड बैंक और 35 दूसरी संस्थाओं के 120 एक्सपर्ट्स शामिल थे. इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन संबंधी 41 प्रमुख संकेतकों का वार्षिक विश्लेषण किया गया है.

लाइव टीवी देखें

रिपोर्ट की सह-लेखिका पूर्णिमा प्रभाकरन ने कहा कि ''द लांसेट काउंटडाउन'' रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ से जुड़े खोज कृषि संबंधी खोज और अंत में जनसंख्या और प्रदूषण संबंधी खोजों के बारे में बताया गया है. शोध में पाया गया कि अगर इसी तरह से जलवायु परिवर्तन होता रहा तो न केवल बचपन बल्कि पूरी जिंदगी प्रभावित होगी. ग्लोबल वॉर्मिंग को नहीं रोका गया तो आज पैदा हुआ बच्चा अपने 71 वें जन्मदिन पर चार डिग्री गर्म दुनिया का सामना करेगा. इससे हीट स्ट्रोक के कारण बीमारियां बढ़ेंगी, अनाज का उत्पादन कम हो जाएगा. ऐसी स्थिति में ये बच्चे अपने जीवन के प्रत्येक चरण में स्वास्थ्य खतरों का सामना करेंगे.

वहीं, पर्यावरणविद् गिरीश रावत ने कहा कि ''द लांसेट काउंटडाउन'' रिपोर्ट के मुताबिक 1960 के दशक के बाद से भारत में कई फसलों के उत्पादन में औसत 2 पर्सेंट की गिरावट आई है. मक्का और चावल में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि धरती के बढ़ते तापमान से कृषि में काफी घाटा देखने को मिला है और अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आनेवाले समय में इसमें और बढ़ोतरी होने की सम्भावना है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य के लिए यह बड़ी चुनौती बन जाएगी.