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आपकी बीमारियों को पहचानने में मदद करेगा यह ‘इंटेलेक्चुअल सूट’

 चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह ने ‘इंटेलेक्चुअल सूट’विकसित करने में सफलता पाई है, जो व्यक्ति के तापमान, पीएच लेवल, दबाव और अन्य स्वाथ्य संबंधी संकेतकों की जानकारी हासिल कर सकेंगा.

आपकी बीमारियों को पहचानने में मदद करेगा यह ‘इंटेलेक्चुअल सूट’

नई दिल्ली : नैनोटेक्नोलॉजी आज के आधुनिक युग में सबसे अधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र हो गया है कंप्यूटिंग से लेकर मेडिकल साइंस तक में नैनोटेक्नोलॉजी का दखल हो गया है. इसी लिए जब चीन के बीजिंग शहर में स्थित जब नैनोएनर्जी और नैनोसिस्टम विषय पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया तो पूरी दुनिया का ध्यान उस जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, क्योंकि नैनोटेक्नोलॉजी न सिर्फ संभावनाओं के लिहाज बहुत संपन्न है बल्कि अनेक वैज्ञानिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए पूरा विज्ञान और तकनीकी विश्व नैनोटेक्नोलॉजी की ओर ही आस लगा रहा है. यही वजह रही कि इस कांफ्रेंस में प्रदर्शित किए गए आविष्कार लोगों को आकर्षित कर रहे हैं और  इन्हीं में से सबसे चर्चित है, ‘इंटेलेक्चुअल सूट’.

हेल्थ संबंधी जानकारी देगा इंटेलेक्चुअल सूट
‘इंटेलेक्चुअल सूट’विकसित करने में चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह ने सफलता पाई है, जिसमें बड़े ‘टेक्टाइल सेंसर्स’ लगे होंगे जो व्यक्ति के तापमान, पीएच लेवल, दबाव और अन्य स्वाथ्य संबंधी संकेतकों की जानकारी हासिल कर सकेंगे. इससे उसको होने वाली बीमारियों की जानकारी हासिल हो सकेगी. चीनी न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक इस आविष्कार को चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज़ के शिक्षाविद, वांग जोंगलिन ने बीजिंग में आयोजित नैनोएनर्जी और नैनोसिस्टम पर तीसरी अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया है. वांग के अनुसार,यह सूट वायरलेस ट्रांसमिशन के जरिए, हजारों मील दूर किसी सेलफोन, कम्प्यूटर या डॉकटर के कम्प्यूटर को भी संकेत भेज सकता है, जिससे किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कभी भी निगरानी रखी जा सकती है.
700 से भी अधिक वैज्ञानिकों ने नैनोसाइंस और एनर्जी  की इस कांफ्रेंस में भाग लिया 
जिंग इंस्टीट्यूट ऑफ नैनोएनर्जी और नौनोसिस्टम ने यह कांफ्रेंस आयोजित की है जो कि नैनोसाइंस और एनर्जी के क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावशाली कांफ्रेंस में से एक है. इस वर्ष इसमें नैनोजनेरेटर्स, स्वचलित सेंसर्स और सिसटम्स, पीजोट्रोनिक्स (piezotronics) पीजोफोटोट्रॉनिक्स (piezphototronics) उर्जा स्टोरेज, और स्वचलित पॉवर सिस्टम्स जैसे विषयों पर फोकस रखा गया. करीब 30 से भी अधिक देशों से आए 700 से भी ज्यादा वैज्ञानिकों   ने इस काफ्रेंस में भाग लिया जो सोमवार को समाप्त हुई.
एक टैटू जो डायबिटीज के मरीजों को खुद दर्दरहित इंजेक्शन देने में करेगा मदद
वांग ने “नैनो टोटूज”के बारे में भी जानकारी दी जो बांह पर ऐसे स्टीकर्स होते हैं जो टैटू के आकार के होते हैं जिनसे मरीज को नसों में दवाई दी जा सकती है जो कि डायबिटीज के मरीजों के लिए इंजेक्शन देने का निजी और दर्दरहित तरीका है. वाग ने कहा कि वैज्ञानिक ने इंस्टीट्यूट के टेक्नोपार्क पर सारे गैजेट्स के प्रोटोटाइप बना कर रखे हैं जो कि दो से तीन साल में बाजार में आ सकते हैं.

(इनपुट आईएएनएस)