ISRO: 4 भारतीय जाएंगे मिशन गगनयान में, जानिए कहां होगी इनकी ट्रेनिंग

इसरो प्रमुख के. सिवन ने बेंगलुरु (Banglore) में इस बात की जानकारी दी और कहा कि इन चयनित अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण जनवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू हो जाएगा. 

ISRO: 4 भारतीय जाएंगे मिशन गगनयान  में, जानिए कहां होगी इनकी ट्रेनिंग
फाइल फोटो

भारत के अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने नए साल पर भारत के आगामी गगनयान मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कर लिया है. इस मिशन के लिए भारतीय वायु सेना के 4 पायलट जाएंगे. इसरो प्रमुख के. सिवन ने बेंगलुरु (Banglore) में इस बात की जानकारी दी और कहा कि इन चयनित अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण जनवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू हो जाएगा. 

जिसके चलते ISRO फरवरी तक रूस (Russia) में चार वायु सेना के पायलटों को अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए रूस भेजने की तैयारी कर चुका है. देश की अंतरिक्ष एजेंसी 2022 में अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान के लिए प्रयास करने वाली है और इसी के साथ ही अगले साल चंद्रमा पर एक रोवर को उतारने के दूसरे प्रयास की योजना भी बना रही है.

ISRO प्रमुख ने विक्रम लैंडर की असफल लैंडिग पर कहा ये...
के. सिवन (K. Sivan) ने बुधवार को कहा कि गगनयान की कई प्रणालियों का परीक्षण करने की आवश्यकता है और इस वर्ष चालक दल प्रशिक्षण एक प्रमुख गतिविधि होगी. उन्होने कहा कि भारत का अगला चंद्र अभियान, चंद्रयान -3, को मंजूरी दी गई थी. उन्होंने कहा कि लॉन्च अगले साल हो सकता है. वहीं केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 31 दिसंबर को कहा कि भारत 2020 में चंद्रयान -3 लॉन्च करेगा. चन्द्रयान -2, चल रहा चन्द्र मिशन काफी हद तक सफल रहा है - लेकिन विक्रम लैंडर (Vikram Lander) सितंबर में चंद्रमा पर उतरने में असफल रहा.

250 करोड़ रुपये का होगा खर्च
सिवन ने कहा कि इसमें पहले की तरह लैंडर, रोवर और एक ‘प्रोपल्शन मॉड्यूल’ होगा. सिवन ने कहा कि चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण अगले साल तक जा सकता है. इसरो चीफ ने कहा कि चंद्रयान-3 और मिशन गगनयान, दोनों का काम एक साथ चल रहा है. गगनयान मानव को अंतरिक्ष में ले जाने का भारत का पहला अभियान है. चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल 7 साल होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे चंद्र मिशन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा. चंद्रयान-3 परियोजना की लागत पर सिवन ने कहा, ‘इस मिशन पर 250 करोड़ रुपये का खर्च होगा.’ 

2019 में ये थी ISRO की रणनीति
साल 2019 में इसरो की रणनीति विस्तार कार्यक्रमों की थी. इसरो ने नए स्पेसपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है और यह पोर्ट तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के थुटुकुडी में बनाया जाएगा. श्रीहरिकोटा के अलावा यह ऐसा दूसरा केंद्र होगा. इसरो प्रमुख ने बताया ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी के निर्माण का काम निजी हाथों में सौंपे जाने की योजना है.

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