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जानवरों से इंसानों में फैलने वाला संक्रमण पहले ही आ सकता है पकड़ में, नई स्टडी में दावा

नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) के बाद से जानवरों से इंसानों में संक्रमण फैलने से रोकने पर तमाम स्टडी हो रही हैं. इसी बीच एक स्टडी में दावा किया गया है कि आने वाले समय में जानवरों से इंसानों में फैलने वाले वायरस की पहचान हो सकेगी. इससे समय रहते कई लोगों की जान बचाई जा सकती है. 

कैसे पता चलेंगे जानवर वाले वायरस?

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कैसे पता चलेंगे जानवर वाले वायरस?

दुनियाभर में कहर बरपाने ​​वाले कोरोनो वायरस (Coronavirus) के अलावा इंसानों को संक्रमित करने वाले तमाम जानलेवा वायरस जानवरों से आए. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के वायरस की पहचान समय रहते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पहचान हो सकती है. 

इतने वायरस आ सकते हैं पकड़ में

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इतने वायरस आ सकते हैं पकड़ में

ग्लासगो यूनिवर्सिटी (University of Glasgow) के नार्डस मोलेंटेज, साइमन बाबयान और डैनियल स्ट्रीकर के मुताबिक सही जेनेटिक मटेरियल (Genetic Material) के साथ एक मशीन यह पता लगा सकती है कि जानवरों में से कौन से वायरस इंसानों को संक्रमित करेंगे. पीएलओएस बायोलॉजी (PLOS Biology) में पब्लिश इस स्टडी के मुताबिक लगभग 10 लाख 70 हजार ऐसे वायरस की पहचान हो सकती है जो पशुओं के जरिए इंसानों में आ सकते हैं.

 

कोरोना के बारे में समय रहते चल सकता था पता

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कोरोना के बारे में समय रहते चल सकता था पता

रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में चीन के वुहान से फैले कोरोना को AI मशीन के जरिए समय रहते पहचाना जा सकता था. अगर ऐसा होता तो एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाती. वैज्ञानिक, मोलेंटेज ने द डेली बीस्ट को बताया, कोई वायरस सिर्फ एक जीनोम सीक्वेंस से ही जानवरों के जरिए इंसानों को संक्रमित कर सकता है क्या? अभी भी इस मॉडल पर रिसर्च चल रही है.

वायरस की जूनोटिक क्षमता से लग सकता है पता

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वायरस की जूनोटिक क्षमता से लग सकता है पता

ग्लासगो यूनिवर्सिटी की टीम ने इसी साल की शुरुआत में लिवरपूल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के साथ इस मामले में रिसर्च को आगे बढ़ाया. SciTechDaily के अनुसार नई रिपोर्ट कहती है, 'हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि वायरस की जूनोटिक क्षमता (Zoonotic Potential of Viruses) का उनके जीनोम सीक्वेंस से काफी हद तक अनुमान लगाया जा सकता है.

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वैक्सीन विकास में भी मदद मिलेगी

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वैक्सीन विकास में भी मदद मिलेगी

वैज्ञानिकों के मुताबिक मशीन के जरिए दुर्लभ वायरस की पहचान कर ली जाए और उनकी बारीकी से निगरानी की जाए तो पहले ही प्रीमेप्टिव वैक्सीन विकास पर काम किया जा सकता है. जो वायरस फैलने से पहले ही इंसानों को सुरक्षित करने में मददगार होगी. 

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