इस दिन और समय पर भारत में नजर आएगा यह दुर्लभ धूमकेतु, देखना न भूलिएगा

14 जुलाई से भारतीय आकाश में एक दुर्लभ कॉमेट (comet) नजर आ रहा है. यह दुर्लभ धूमकेतु 4500 सालों में पहली बार सूर्य के निकट आ रहा है. कॉमेट नियोवाइस (Comet Neowise या C/20202 F3) 14 जुलाई से सौर्यमंडल में अपनी जगह बनाए हुए है

इस दिन और समय पर भारत में नजर आएगा यह दुर्लभ धूमकेतु, देखना न भूलिएगा
यह धूमकेतु 4500 सालों में पहली बार सूर्य के निकट आ रहा है

नई दिल्ली: 14 जुलाई से भारतीय आकाश में एक दुर्लभ कॉमेट (comet) नजर आ रहा है. यह दुर्लभ धूमकेतु 4500 सालों में पहली बार सूर्य के निकट आ रहा है. कॉमेट नियोवाइस (Comet Neowise या C/20202 F3) 14 जुलाई से सौर्यमंडल में अपनी जगह बनाए हुए है और भारतीय भी अपनी आंखों से उसे आसानी से देख सकते हैं. इसके लिए उन्हें अलग से कोई चश्मा या टेलीस्कोप लेने की भी कोई जरूरत नहीं है.
देखा जाए तो 2020 में स्वान (Swan) और एटलस (Atlas) के बाद यह तीसरा धूमकेतु है, मगर पहला ऐसा कॉमेट है, जिसे अपनी आंखों से देखा जा सकता है. भारतीय लोग उत्तर-पश्चिम आकाश में 2 अगस्त तक इसे देख सकते हैं. इस कॉमेट की खोज मार्च में नियोवाइस (NEOWISE) स्पेस टेलीस्कोप द्वारा की गई थी. इस धूमकेतु का आधिकारिक नाम  C/2020 F3 NEOWISE रखा गया था और शॉर्ट में इसे NEOWISE कहते हैं. 

कब आएगा नजर 
आमतौर पर सौर्यमंडल में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने या उन्हें निहारने के लिए टेलीस्कोप, विशेष चश्मे या एक्स रे फिल्म की जरूरत पड़ती है. मगर इस दुर्लभ धूमकेतु की चमक इतनी बढ़ चुकी है कि इसे अपनी आंखों से देख जा सकता है. यह 23 जुलाई को 01:14 UT बजे पृथ्वी के सबसे निकट आएगा. नासा (NASA) के नियोवाइस यानि कि (NEOWISE) का फुल फॉर्म Near-Earth Object Wide-field Infrared Survey Explorer है. इसको अपने जीवनकाल में सिर्फ एक ही बार देखा जा सकता है क्योंकि अगले 6800 सालों तक यह फिर से पृथ्वी के पास से नहीं गुजरेगा. 

भारत में देखें दुर्लभ कॉमेट
14 जुलाई से अगले 20 दिनों तक Comet NEOWISE उत्तरीय Hemisphere के आकाश में नजर आएगा. भारत में इसे उत्तर पश्चिम आकाश  में सूरज उगने और उसके डूबने के बाद देखा जा सकेगा. ओडिशा के पठानी सामांत तारामंडल, भुवनेश्वर के उप निदेशक डॉ. सुभेंदु पटनायक के अनुसार, यह धूमकेतु 14 जुलाई से अगले 20 दिनों तक हर रोज लगभग 20 मिनट तक नग्न आंखों से देखा जा सकेगा. अगस्त तक धूमकेतु के दूर हो जाने की उम्मीद है और फिर इसे दूरबीन से ही देखा जा पाना संभव हो सकेगा.

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क्या होते हैं धूमकेतु
धूमकेतु  सौरमंडल में पत्थर, धूल, कार्बन डाईऑक्साइड, अमोनिया, बर्फ और मीथेन से मिलकर बने हुए छोटे-छोटे खंड होते हैं. ये ग्रह की तरह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं. इस चक्कर में हजारों साल का वक्त लग जाता है इसलिए ये हजारों सालों में एक बार ही नजर आते हैं.

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