गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त

गीत गुनगुनाने से सिर्फ आपका मूड ही फ्रेश नहीं होता, बल्कि इससे आपकी याददाश्त भी दुरुस्त रहती है। फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है। वैज्ञानिक तेपो सरकामो के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के बारे में शोधार्थियों ने बताया कि गीत-संगीत विशेषकर गायन डिमेंशिया रोग के प्रारंभिक चरणों में संज्ञानात्मक और भावात्मक रूप से काफी कारगर होता है।

गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त

हेलसिंकी: गीत गुनगुनाने से सिर्फ आपका मूड ही फ्रेश नहीं होता, बल्कि इससे आपकी याददाश्त भी दुरुस्त रहती है। फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है। वैज्ञानिक तेपो सरकामो के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के बारे में शोधार्थियों ने बताया कि गीत-संगीत विशेषकर गायन डिमेंशिया रोग के प्रारंभिक चरणों में संज्ञानात्मक और भावात्मक रूप से काफी कारगर होता है।

इस शोध के अनुसार, संगीत मानसिक रोगियों की देखभाल में ज्यादा लाभकारी होता है। इसे डिमेंशिया की विभिन्न चरणों में असरदार माना गया है। शोध के क्रम में शोधार्थियों ने 89 लोगों पर परीक्षण किया, जो डिमेंशिया के शुरुआती चरण में थे। वैज्ञानिकों ने रोगियों की देखभाल करने वालों से उन्हें 10 हफ्तों तक संगीत सिखाने के लिए कहा, जिससे मानसिक रोगी विभिन्न गीतों को सीखने के साथ ही सुन और गा भी सकें।

इससे पहले हुए शोधों से साबित हुआ है कि संगीत की गतिविधियां मानक देखभाल की तुलना में याददाश्त दुरुस्त रखने में ज्यादा सक्षम होती हैं, लेकिन इस शोध से पता चला है कि गाना और सुनना दोनों ही अल्जाइमर जैसी डिमेंशिया बीमारी पर अच्छा असर डालता है।

लेखक ने बताया, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि डिमेंशिया पीडि़त संगीत की पृष्ठभूमि वाले रोगियों में संगीत का हस्तक्षेप प्रभावकारी नहीं देखा गया है। सरकामो का कहना था, हमारे निष्कर्ष यह बताते हैं कि डिमेंशिया पीडि़त रोगियों की देखभाल और उन्हें ्रपूर्वदशा में ले आने में संगीत का उपयोग व्यापक रूप से किया जा सकता है।