मंगल पर जीवन के सबूत खोजना कितना मुश्किल? सामने आई यह अहम स्‍टडी

मंगल ग्रह की सतह पर बहे अम्लीय तरल पदार्थ (Acidic fluids) ने आयरन रिच मिट्टी में छिपे हुए जीवन के सबूतों को नष्‍ट कर दिया है.

मंगल पर जीवन के सबूत खोजना कितना मुश्किल? सामने आई यह अहम स्‍टडी
फाइल फोटो

वाशिंगटन: मंगल ग्रह की सतह पर बहे अम्लीय तरल पदार्थ (Acidic fluids) ने आयरन रिच मिट्टी में छिपे हुए जीवन के सबूतों को नष्‍ट कर दिया है. यह कहना है कार्नेल विश्वविद्यालय और स्पेन के सेंट्रो डी एस्ट्रोबायोलॉजिया के रिसर्चर्स का. शोधकर्ताओं ने मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना का पता लगाने के लिए मिट्टी और एमीनो एसिड का सिमुलेशन किया है. उनका  'Constraining the Preservation of Organic Compounds in Mars Analog Nontronites After Exposure to Acid and Alkaline Fluids' पेपर 15 सितंबर को नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट में पब्लिश किया गया था.

कॉर्नेल में कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में खगोल विज्ञान विभाग के विजिटिंग साइंटिस्‍ट अल्बर्टो जी फेयरन इस पेपर के एक लेखक हैं.

बता दें कि नासा द्वारा 30 जुलाई को लॉन्च किया गया Perseverance Rover अगले साल फरवरी में मंगल के Jezero Crater में उतरेगा. वहीं यूरोपीय स्पेस एजेंसी का Rosalind Franklin Rover साल 2022 के आखिर में लॉन्च होगा.

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आसान नहीं ये काम
Perseverance मिशन मंगल ग्रह की मिट्टी के नमूने इकट्ठा करेगा और 2030 तक उन्हें पृथ्वी पर भेजेगा. जबकि यूरोपीय स्‍पेस एजेंसी से भेजा गया रोवर मंगल की सतह पर ड्रिल करेगा, मिट्टी के नमूने एकत्र करेगा और उनका विश्लेषण भी करेगा.

मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश में मिट्टी के नमूने इकट्ठे करना हमेशा मुख्‍य लक्ष्‍य है क्‍योंकि मिट्टी की सतह आणविक कार्बनिक पदार्थों को अपने अंदर संरक्षित रखती है और उससे ही वहां पर जीवन के प्रमाण की पुष्टि हो सकती है. हालांकि, इसकी सतह पर अतीत में एसिड की उपस्थिति ने मिट्टी से जीवन के सबूत मिटा दिए हैं. 

फेयरेन ने कहा, 'हम जानते हैं कि मंगल की सतह पर पहले अम्लीय तरल पदार्थ बह चुके हैं, जिसने मिट्टी की जीवों की रक्षा करने की क्षमता में बदलाव लाए हैं.' 

उन्‍होंने आगे कहा कि मिट्टी की आंतरिक संरचना परतों में होती है, जहां बॉयोलॉजिकल लाइफ के सबूत - जैसे लिपिड, न्यूक्लिक एसिड, पेप्टाइड्स और अन्य बायोपॉलिमर्स आदि फंस सकते हैं और संरक्षित रह सकते हैं.

प्रयोगशाला में शोधकर्ताओं ने मंगल की मिट्टी में ग्लाइसिन नामक एक एमिनो एसिड को संरक्षित करने के लिए ग्रह जैसी वो स्थितियां पैदा कीं जिनमें वह अम्लीय तरल पदार्थों के संपर्क में आया था.

उन्होंने कहा, 'हमने ग्लाइसिन का इस्तेमाल किया क्योंकि यह ग्रह की पर्यावरणीय परिस्थितियों में तेजी से डिग्रेड हो सकता है.'

उन्‍होंने आगे कहा, 'जब मिट्टी अम्लीय तरल पदार्थ के संपर्क में आती है, तो उसकी परतें ढह जाती हैं और ऐसे में कार्बनिक पदार्थ को संरक्षित नहीं हो पाता है. हमारे पेपर के परिणाम बताते हैं कि मंगल पर ऑर्गेनिक कंपाउंड्स या जीवन की खोज करना कितना कठिन है.'