रिटायरमेंट प्लानिंग के 5 गोल्डन रूल, किसी भी उम्र में आजमा सकते हैं

आप रिटायरमेंट प्लानिंग के 5 गोल्डन रूल को किसी भी उम्र में आजमा सकते हैं. अगर आप भाग्यशाली हैं, तो आप अपना रिटायरमेंट पहले भी शुरू कर सकते हैं.

रिटायरमेंट प्लानिंग के 5 गोल्डन रूल, किसी भी उम्र में आजमा सकते हैं

आप रिटायरमेंट प्लानिंग के 5 गोल्डन रूल को किसी भी उम्र में आजमा सकते हैं. अगर आप भाग्यशाली हैं, तो आप अपना रिटायरमेंट पहले भी शुरू कर सकते हैं. चिकित्सा के क्षेत्र में होने वाली प्रगति और हमारे रहन-सहन के स्तर में हो रहा सुधार मिलकर हमारे ज्यादा दिन जिंदा रहने की उम्मीद को बढ़ाते जा रहे हैं. 

एक सर्वे के मुताबिक, भारत में प्रजनन की दर गिरने और जीवन-प्रत्याशा बढ़ने से 2031 से 20141 के बीच केवल 0.5% की दर से ही बढ़ना संभावित है. जीवन-प्रत्याशा पुरुषों और महिलाओं, दोनों में बढ़ना जारी रहेगी. इसलिए अगर अन्य देशों के अनुभवों को देखा जाए तो रिटायरमेंट की उम्र (काम करने से सेवानिवृत्ति) भी महिलाओं और पुरुषों दोनों के मामले में बढ़ना तय है. लंबे अर्से तक, लोग 55 से 60 साल की उम्र तक ही काम करना पसंद करते थे और उसके बाद वो सेवानिवृत्त हो जाते थे. हालांकि अब पहले की तुलना में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है. 60 की उम्र गुजरने के अगले 15 साल तक लोग काम करना चाह रहे हैं. चूंकि काम से विश्राम लेने की उम्र तो बढ़ना अवश्यसंभावी ही है, तो इन बदलावों के संकेतों को समय से पहले भांप लेना ही बेहतर रहेगा. शायद उससे एक दशक पहले ही, तो इसके लिए वर्कफोर्स को पहले से तैयार किया जा सकेगा.

हम यहां रिटायरमेंट की योजना बनाने के 5 गोल्डन रूल की चर्चा करेंगे:  

बचत जल्दी शुरू करें और अक्सर करें
रिटायरमेंट की प्लानिंग का पहला रूल काफी आसान है. पहले तो आपको हर साल अपनी कुल कमाई का 10 से 15 फीसदी हिस्सा बचाकर रखना पड़ेगा ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके पास जिंदगी गुजारने के लिए पर्याप्त धन हो. दूसरे ये अच्छा है कि आप अपनी बचत अपनी उम्र के 30 वाले दशक मे ही करना शुरू कर दें. हालांकि, तनाव रहित बुढ़ापा गुजारने के लिए इससे पहले ही शुरू करना बेहतर होगा. अपने रिटायरमेंट के बारे में काफी पहले से योजना बनाने से आपके पास एक बड़ा फंड इकट्ठा हो जाएगा, जिससे रिटायरमेंट के बाद आपके पास नियमित आय का एक साधन होगा. एक जरूरत के फीचर्स वाला पेंशन प्लान चुनने से आपको बीमा कवर के साथ लाभ भी मिलेगा.

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माना आप 30 साल की उम्र में अगले 30 साल तक 10,000 रुपए सालाना बचत करना शुरू करते हैं. अगर 8 फीसदी की भी ब्याज मिली तो आपका पैसा कुल 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा. अगर आपका दोस्त 45 साल की उम्र में बीस हजार रुपये हर साल जमा करता है, तो 15 साल की अवधि के बाद उसका फंड केवल 70 लाख का ही होगा. यहां तक कि आपके दोस्त ने आपसे दोगुना पैसा जमा किया था क्योंकि आपने जल्दी ये बचत शुरू कर दी थी. आपके पास रिटायरमेंट के वक्त दोगुने से भी ज्यादा पैसा हो सकता है. चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से अभी बचाया गया थोड़ा सा पैसा रिटायरमेंट के बाद एक बड़ी रकम बन सकता है. लेकिन ज्यादा से ज्यादा फायदे के लिए, जल्दी से जल्दी इस बचत की शुरुआत करनी चाहिए.

रिटायरमेंट के बाद अपनी जरूरतों की योजना बनाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद आपकी बचत का कुल 70 फीसदी हिस्सा आपके रोजमर्रा के रहन-सहन के खर्चों में जाएगा, तब तक आपको मिलने वाला वेतन या आय भी खत्म हो जाएगी. इस समस्या से बचने का एक ही तरीका है कि तब की प्लानिंग काफी पहले से ही कर ली जाए. अपने वित्तीय हालातों की कायदे से समीक्षा के बाद, आप अपने छोटे-बड़े और बहुत बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पहचानने में सक्षम होंगे. अपनी जरूरतों और लक्ष्यों की एक लिस्ट बनाएं. ध्यान रखें कि आपकी रोजाना की जिंदगी के खर्चों का बंदोबस्त सबसे पहले आना चाहिए. सबसे बड़ी बात वास्तविक लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को तय करना है. आपको पता ही होना चाहिए कि रिटायरमेंट के बाद आपकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कितने धन की जरूरत होगी. चाहे आप पूरी दुनिया की सैर की योजना बना रहे हैं या फिर अपने परिवार के साथ पूरी जिंदगी बिताने के मूड में हैं, आपको रिटायरमेंट के बाद क्या करना है, इसके बारे में एक स्पष्ट आइडिया आपके दिमाग में होना ही चाहिए.

मुद्रास्फीति को भी ध्यान में रखें
मुद्रास्फीति आपकी बचत की असली कीमत खा जाएगी. सरल शब्दों में, आपका धन उतनी चीजें अगले साल नहीं खरीद पाएगा, जितनी कि इस साल कर सकता था. गुजरते वक्त के साथ आप उतने ही पैसे से उतना सामान नहीं खरीद पाओगे, जितना कि अब खरीद सकते हो. रिटायरमेंट के लिए किए निवेश को करते वक्त मुदास्फीति फैक्टर को तो ध्यान में रखना ही होगा. मुद्रास्फीति तो आपके रिटायरमेंट के बाद के बरसों में भी जारी रहेगी, इसके बारे में सोचिए.

हेल्थकेयर खर्चों के लिए भी बनाएं योजना
रिटायरमेंट के बाद के लिए जब आप बड़े फंड की योजना बनाएंगे तो याद रखें कि बढ़ती उम्र के साथ साथ हेल्थकेयर के खर्चे भी बढ़ जाते हैं. बुढ़ापे के साथ साथ स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ना भी तय है, और मेडिकल बिल आपकी सारी बचत को खा सकते हैं. इसलिए जब आप रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, तो हेल्थ इंश्योरेंस एक बड़ा रोल प्ले करता है. कवरेज और मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर अपनी जरूरतों के हिसाब से कोई भी अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान चुना जा सकता है. बाजार में तमाम तरह के विकल्प उपलब्ध हैं. एक आरामदायक पोस्ट रिटायरमेंट जीवन जीने के लिए पास में पैसा और अच्छा स्वास्थ्य दोनों जरूरी हैं. ये सुनिश्चित करें कि आपके पास इंश्योरेंस या किसी और फंड के जरिये मेडिकल इमरजेंसी में बिल भरने का कोई रास्ता मौजूद है. 

रिटायर होने से पहले अपने रिटायरमेंट फंड को हाथ ना लगाएं
आमतौर पर लोगों की आदत होती है कि बच्चों की शादी, घर खरीदने, या किसी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त अपने रिटायरमेंट के फंड से पैसा निकाल लेते हैं. जब पैसा उसमें से निकाल लिया जाता है तो ये चक्रवृद्धि की ताकत कम कर देता है. अगर पेंशन अकाउंट को नहीं छुआ जाता है तो 25000 रुपये कमाने वाला आम आदमी 35 साल के बाद 1.65 करोड़ रुपए इकट्ठा कर सकता है. इसलिए ये सलाह दी जाती है कि आप अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स को कभी हाथ ना लगाएं, क्योंकि अगर आप अभी पैसा निकालोगे तो अपने मूल धन और ब्याज दोनों का नुकसान करोगे.

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(डिस्क्लेमर: लेखिका संतोष अग्रवाल लाइफ इंश्योरेंस, policybazaar.com की चीफ बिजनेस ऑफिसर हैं. ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं)