ANALYSIS : राजस्‍थान उपचुनाव में इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा

कांग्रेस के राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस के जीतने में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ का एक बड़ा योगदान हो सकता है. 

ANALYSIS : राजस्‍थान उपचुनाव में इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा

राजस्थान के अजमेर और अलवर लोकसभा सीटों तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव को आने वाले चुनाव के सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा था... ऐसे में इन दोनों लोकसभा सीटों पर अपराजेय बढ़त और मांडलगढ़ में जीत के बाद यह संकेत कहीं न कहीं यह इशारा कर रहे हैं कि कहीं ना कहीं राजस्थान फिर से इतिहास दोहराने पर भरोसा कर रही है. अलवर सांसद महंत चांदनाथ और अजमेर सांसद सांवरलाल जाट के निधन से दोनों सीटें खाली हुई हैं. मांडलगढ़ से बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी का स्वाइन फ्लू से निधन हो गया था.

बदलती है हर बार सत्ता
राजस्थान का चुनावी इतिहास बताता है कि वहां पिछले 5 बार के चुनावों से हर बार सरकार बदलती रही है. 1993 में जहां भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, वहीं 1998 में कांग्रेस ने इतिहास बनाया था और राज्य की 153 सीटें जीती थी. फिर 2003 में भाजपा ने राज्य में सत्ता पलट करते हुए 120 सीटों पर कब्जा जमाया. तो 2008 में कांग्रेस ने एक बार फिर 96 सीटें हासिल की और सत्ता में आ गई. इसके बाद पिछली बार के चुनाव में 2013 में भाजपा ने फिर अपने ही पुरारे सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 163 सीटों पर कब्जा कर लिया था. अगर इतिहास अपने को दोहराता है तो ये माना जा सकता है कि कांग्रेस फिर से इस बार सत्ता पर काबिज़ हो सकती है.

पद्मावत भी है एक कारण
कांग्रेस के राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस के जीतने में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ का एक बड़ा योगदान हो सकता है. राजस्थान में उपचुनाव में वोटिंग इस बार सिर्फ एक ही मुद्दे पर हुई और वो था जातियों का समीकरण. इसी कारण ने इस बार राज्य के उपचुनाव में ‘पद्मावत’ को अहम बना दिया. दरअसल अजमेर लोकसभा सीट पर रावण राजपूतों को गेमचेंजर माना जा रहा है. रावण राजपूत समुदाय की अजमेर में अच्छी-खासी आबादी है. एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जहां दोनों ही पार्टियां अपने परंपरागत वोटरों और समर्थकों पर निर्भर हों, वहां रावण राजपूतों के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं.

वैसे तो राजपूत समुदाय चुनावों में बीजेपी का समर्थन करता आया है, लेकिन इस बार दो मुद्दों ने राजपूतों को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने पर मजबूर कर दिया था, जिसमें पहला मुद्दा था गैंगस्टर आनंद पाल सिंह की पुलिस एनकांउटर में मौत, जिसकी छवि रॉबिनहुड जैसी थी. गैंगस्टर आनंद पाल सिंह की मौत ने राज्य के राजपूतों को खासा नाराज कर दिया था औऱ इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार राजपूत समुदाय को समझाने में नाकाम रही थी. दूसरा मसला था पद्मावत की रिलीज. राजपूतों की वसुंधरा राजे सरकार से मांग थी कि 'पद्मावत' पर बैन लगाया जाए, लेकिन वसुंधरा सरकार ने ऐसा करने में असमर्थता जता दी थी. इससे राजपूतों में काफी निराशा का माहौल था. राजपूतों का मानना है कि बीजेपी ने उन्हें नीचा दिखाया है.

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)