नई कार के लिए 'एड ऑन' इंश्योरेंस कवर लेना है कितना जरूरी?

एक ग्राहक के रूप में केवल थर्ड पार्टी अनिवार्य इंश्योरेंस कवर लेकर हम 100 फीसदी प्रतिरक्षा नहीं पा सकते. जब आप कॉम्प्रिहेंसिव (व्यापक) इंश्योरेंस कवर भी लेते हैं, तो ये भी नुकसान के विभिन्न प्रकारों के लिए आपको पूरी कवरेज नहीं देता. 

नई कार के लिए 'एड ऑन' इंश्योरेंस कवर लेना है कितना जरूरी?
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

हर साल भारत में 10 लाख रोड एक्सीडेंट्स होते हैं, जिनमें 1.5 लाख के करीब लोग मरते हैं यानी 1 दिन में 400 लोगों की मौत एक्सीडेंट्स में ही हो जाती है.

ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे मिनिस्ट्री से जुड़े ट्रांसपोर्ट रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सीडेंट्स से होने वाली कुल मौतों में 35 फीसदी मौतें नेशनल हाईवेज पर और 28 फीसदी मौतें स्टेट हाईवेज पर होती हैं. चूंकि हम ऐसे एक्सीडेंट्स को नगण्य नहीं बना सकते, ऐसे में एक्सीडेंट्स के दौरान नुकसान से होने वाली भरपाई में विविधता होनी चाहिए. मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के मुताबिक, सड़क पर किसी भी वाहन को चलाने के लिए मान्य मोटर ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होना चाहिए. हालांकि एक ग्राहक के रूप में केवल थर्ड पार्टी अनिवार्य इंश्योरेंस कवर लेकर हम 100 फीसदी प्रतिरक्षा नहीं पा सकते. जब आप कॉम्प्रिहेंसिव (व्यापक) इंश्योरेंस कवर भी लेते हैं, तो ये भी नुकसान के विभिन्न प्रकारों के लिए आपको पूरी कवरेज नहीं देता. किसी भी व्यक्ति को जोखिम कवर के साथ साथ एड ऑन कवर भी लेना चाहिए.

रिटर्न टू इनवॉयस: ये सुनिश्चित करेगा कि कार मालिक को पूरी इनवॉइस वैल्यू मिले, यानी कार की मूल कीमत, जिसमें रजिस्ट्रेशन फीस के साथ रोड टैक्स और खरीद के समय कार की एक्स शोरूम कीमत भी शामिल हो. संक्षिप्त में समझें तो जो बीमा वाले कार की कीमत लगाते हैं और जो मूल कीमत होती है, उसके बीच की जगह को ये एड ऑन कवर भर देता है. ये एड ऑन कवर रिपेयरिंग या छोटे नुकसान के लिए इस्तेमाल नहीं होता है. इसका इस्तेमाल तो किसी चोरी हो चुकी कार या रिपेयरिंग स्तर से बड़ी क्षति के चलते बड़े वित्तीय नुकसान को भरने के लिए किया जाता है.

जीरो डेप्रिसिएशन कवर: इस एड ऑन कवर की नई कारों के लिए खासतौर पर सिफारिश की जाती है, क्योंकि ये प्लास्टिक/रबर, फाइबर, मेटल या पेंट मटेरियल जैसे बदलने वाले पार्ट्स पर लगने वाली अवमूल्यन की कीमत को कम करने में मदद करता है. इसे नगण्य अवमूल्य या ‘बम्पर टू बम्पर’ कवर के तौर पर भी जाना जाता है. यह कवरेज से अवमूल्यन फैक्टर को निकाल बाहर करता है. आपको पूरा पैकेज देता है. ये स्टैंडर्ड प्रीमियम का आमतौर पर 15 से 20 फीसदी के बराबर पड़ता है और कार मालिकों के लिए काफी फायदेमंद होता है.

रोडसाइड असिस्टेंस: सोचिए कि आप किसी जरूरी काम से कहीं जा रहे हैं और आपकी गाड़ी का पेट्रोल खत्म हो जाता है या आपका टायर पंक्चर होकर फ्लैट हो जाता है या फिर किसी एकांत जगह पर आपकी गाड़ी में अन्य कोई खराबी आ जाती है- ऐसी सभी परिस्थितियों में आपको कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं. मसलन आपको गाड़ी सही करने के लिए सही मैकेनिक की तलाश में कई घंटे सड़क पर गुजारने पड़ सकते हैं. रोड साइड एड ऑन कवर इसी तरह की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था, जहां बीमा कंपनी का व्यक्ति आपकी मदद को फौरन आपके पास पहुंचता है. यहां तक कि ऐसे केस में भी जब आपकी कार लॉक हो गई है और कार की चाभी कार के अंदर ही रह गई है. ऐसे में आपकी बीमा कंपनी अपने एक्जीक्यूटिव को आपके घर भेजेगी और वो वहां से आपके पास डुप्लीकेट चाभी लेकर आएगा. ये एड ऑन कवर बेहद कम पैसे में आपको मिल जाएगा, 150 रुपए से 500 रुपए के बीच. ये कीमत इस पर निर्भर करती है कि आपकी कार की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) क्या है.

इस एड ऑन कवर का सबसे फायदेमंद पहलू ये है कि इसको एक सर्विस की तरह लिया जाता है, बीमा क्लेम की तरह नहीं. चाहे आप कितनी भी बार इसका फायदा उठाएं.

इंजन प्रोटेक्शन: एक स्टैंडर्ड कार इंश्योरेंस पॉलिसी एक एक्सीडेंट की वजह से कार इंजन को होने वाले हर नुकसान को कवर करती है. लेकिन अगर इंजन या उसके किसी पार्ट में पानी घुस जाता है या ऑयल लीक होने के चलते कोई खराबी आती है, तो एक स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी भी आपको कोई मदद नहीं करेगी. उदाहरण के लिए, आप बारिश में किसी दिन कहीं बाहर हैं और आपकी कार के इंजन में पानी घुस जाता है और उसमें खराबी आ जाती है, एक स्टैंडर्ड बीमा पॉलिसी आपको रिपेयर का खर्च नहीं देगी. ऐसे ही अगर बिना इंजन ऑयल के आप कार चला रहे हैं और कार के इंजन में खराबी आ जाती है या सड़क के गड्ढों के चलते इंजन में खराबी आ जाती है तो आपको बीमा कंपनी पैसा नहीं देगी. चूंकि इंजन रिपेयरिंग की कीमत काफी ज्यादा होती है और एक मीडियम साइज कार के लिए 20,000 रुपए से लेकर 50,000 रुपए के बीच कहीं पड़ती है. ऐसे में आपको इंजन प्रोटेक्शन एड ऑन कवर लेना चाहिए. खासतौर पर पानी भरने या ऑयल लीकेज से इंजन में होने वाली खराबी के लिए. ये एड ऑन कवर एक जरूरी कवर है, जो बड़े खर्चे से बचने के लिए कार की इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (आईडीवी) के केवल 0.15 फीसदी से लेकर 0.20 फीसदी तक की मामूली प्रीमियम कॉस्ट में पड़ता है.

NCB प्रोटेक्टर: नो क्लेम बोनस (NCB) एक डिस्काउंट है, जब आप पूरे साल कोई क्लेम नहीं करते हैं, तो आपकी पॉलिसी के नवीनीकरण के वक्त आपको अगले प्रीमियम में बीमा कंपनी कुछ डिस्काउंट देती है. इसे नो क्लेम बोनस कहा जाता है और जितने साल आप कोई क्लेम नहीं करते हैं, आपका डिस्काउंट परसेंटेज हर साल बढ़ता ही चला जाता है. लेकिन जब भी आपने किसी नुकसान के लिए कोई बीमा क्लेम ले लिया तो तब तक इकट्ठा हुआ आपका नो क्लेम बोनस खत्म हो जाता है. इसी नो क्लेम बोनस (NCB) को सुरक्षित रखने के लिए बीमा कंपनियों ने NCB प्रोटेक्टर नाम से एक एड ऑन कवर शुरू किया है, जो क्लेम करने से पहले तक आपका एक निश्चित NCB बरकरार रखने के लिए कार मालिक को रिवॉर्ड देता है.

उदाहरण के लिए, पॉलिसी खरीदते वक्त अगर आपके पास 35 फीसदी नो क्लेम बोनस है और आपने नई पॉलिस की अवधि में केवल एक ही क्लेम किया है, नियम के तहत आपका एनसीबी जीरो हो जाएगा. लेकिन अगर आप क्लेम ना करें तो आपका एनसीबी 45 फीसदी हो जाएगा. इस केस में आप अगले साल नवीनीकरण के वक्त 35 फीसदी के एनसीबी (वही स्लैब) या 25 फीसदी के एनसीबी (लोअर स्लैब) के हकदार होंगे, जैसा आपके प्रोडक्ट पर निर्भर करता है.

सबसे खास बात ये है कि आपको साल के अंत में एड ऑन कवर का नवीनीकरण पुरानी वाली बीमा कंपनी से ही करवाना चाहिए, नहीं तो आप मिलने वाले तमाम लाभों को खो देंगे.

(लेखक पॉलिसी बाजार डॉट कॉम के हेड (मोटर इंश्योरेंस) हैं.) 
(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं)