डियर जिंदगी : तनाव और 'अ'सोशल टेक्‍नोलॉजी

भारतीय समाज. जो सबसे अधिक अपने मिलनसार स्‍वभाव. मित्रता और उत्‍सवप्रियता के लिए जाना जाता था. उस समाज की दीवारें अब दरकने लगी हैं. हम मिलने की जगह मैसेंजर से संतुष्‍ट रहने लगे हैं.

डियर जिंदगी : तनाव और 'अ'सोशल टेक्‍नोलॉजी

हमारे देश में यह बात अक्‍सर कही जाती है कि जब कभी अपनी उम्र के लोगों के बीच किसी बात पर सहमति न हो सके तो 'बड़ों' के पास जाना चाहिए. यहां बड़े का अर्थ उससे है, जो उम्र, अनुभव/ जानकारी में हमसे अधिक जानता हो. ए‍क ऐसे समय में जब सब ओर टेक्‍नोलॉजी का शोर है. हम उसका जरूरत से ज्‍यादा इस्‍तेमाल कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी अब हवा और पानी जितनी जरूरी हो गई. जिंदगी में उसका दखल हमारी ऊर्जा, संवेदना और चिंतन की सीमाओं को पार करते हुए रिश्‍तों के 'खलनायक' जैसा हो गया है. यहां तक कि अब हमारी नींद, सपने भी इसके आसपास मंडराते रहते हैं.

टेक्नोलॉजी, मोबाइल और चैट का त्रिकोण सपनों, नींद तक में खलल पैदा कर रहा है. इसके दखल का असर ऐसे समझिए कि एपल के दो बड़े निवेशकों ने बच्‍चों को आईफोन की लत से बचाने के लिए उपाय तलाशने को कहा है. और हम...

हमारा भारतीय समाज. जो सबसे अधिक अपने मिलनसार स्‍वभाव. मित्रता और उत्‍सवप्रियता के लिए जाना जाता था. उस समाज की दीवारें अब दरकने लगी हैं. हम मिलने की जगह मैसेंजर से संतुष्‍ट रहने लगे हैं. संवाद की जगह सोशल मीडिया पर रिश्‍ते गढ़ने (दोस्‍त, फॉलोअर्स) में हमारी रुचि कई गुना बढ़ गई है. हमने इस आभासी दुनिया को ही असली मान लिया है.

यह भी पढ़ें- डियर जिंदगी : दुनिया के रंग और 'शीशमहल'...

इसके खतरों के बारे में बातें तो खूब हो रही हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा! तो जाहिर है, हमें किसी बुजुर्ग की बात सुननी ही चाहिए. टेक्‍लोलॉजी पर बात करने के लिए 56 बरस के एपल के सीईओ टिम कुक से बेहतर 'बुजुर्ग' कौन हो सकता है. सबसे बड़ी टेक्‍नोलॉजी कंपनी के मुखिया टिम ने जरूरत से ज्‍यादा टेक्नोलॉजी के इस्‍तेमाल पर गहरी चिंता जताई है. कुक ने कहा है, 'मैंने इतनी बड़ी सफलता कभी टेक्‍नोलॉजी के दम पर हासिल नहीं की.' उन्‍होंने जोर देकर कहा कि स्‍कूलों में इसकी तय करने की जरूरत है. बच्‍चों को इससे दूर रखना ही चाहिए. कुक यहीं नहीं रुके, उन्‍होंने कहा कि उनका कोई बच्चा नहीं है, केवल एक भतीजा है, उसे भी वह सोशल मीडिया में नहीं आने देना चाहते.

कुक टेक्नोलॉजी प्रिय समाज में 'बुजुर्ग' हैसियत वाले व्‍यक्‍ति हैं. इस सूची में बिल गेट्स और वारेन बफे जैसे दिग्‍गजों का भी नाम है, जो टेक्नोलॉजी के अत्‍यधिक उपयोग को लेकर समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं.

यह भी पढ़ें-  डियर जिंदगी : 'जागते' रहो को भूलते हुए...

इनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया के कारण बच्‍चों, युवाओं में तनाव, डिप्रेशन और चिंता का बढ़ना है. एक ओर अमेरिका, यूरोप का ऐसा समाज है, जो टेक्नोलॉजी का जनक है, वही इनसे दूर रहने को कह रहा है. इनका उपयोग संभलकर करने की सलाह दे रहा है. तो दूसरी ओर हम हैं. जो हर बात में दूसरे की आधी-अधूरी नकल में जुट जाते हैं. भले ही उसका हमारे जीवन पर कैसा ही असर हो रहा हो.

बच्‍चों की सृजनात्‍मकता और संवेदनशीलता पर सबसे अधिक खतरा कम उम्र में मोबाइल के उपयोग से है. लेकिन हम जो उनको कुछ नया सिखाने के लिए सबसे अधिक बेचैन हैं. यह नहीं समझ रहे कि उनकी राह में सबसे बड़ी मुश्किल अनजाने में हम ही पैदा कर रहे हैं.

सभी लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें : डियर जिंदगी

(लेखक ज़ी न्यूज़ में डिजिटल एडिटर हैं)

(https://twitter.com/dayashankarmi)

(अपने सवाल और सुझाव इनबॉक्‍स में साझा करें: https://www.facebook.com/dayashankar.mishra.54)

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.