दुनिया का पहला संस्कृत बैंड : हम ‘ध्रुवा’ हैं, आए बांटने चैन...

भोपाल का ‘ध्रुवा’ संगीत वृन्द, दुनिया का पहला और अकेला ऐसा समूह है जिसने करीब दो हज़ार बरस पुराने संस्कृत साहित्य को नया सांगीतिक संस्कार देकर उसे वैश्विक अनुगूंज बनाने का अभियान शुरू किया है.

दुनिया का पहला संस्कृत बैंड : हम ‘ध्रुवा’ हैं, आए बांटने चैन...
Image Credit: ‘ध्रुवा’ की दिव्यता को साधने का उपक्रम करीब पांच बरस से ज़ारी था, जो इस बरस जाकर पूरा हुआ.