INDvsAUS: भारत के बल्लेबाजों के लिए तेज व उछाल भरे विकेटों पर खेलना आसान नहीं

भारतीय टीम को पर्थ में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया से 146 रन से हार का सामना करना पड़ा. अब दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर हैं. 

INDvsAUS: भारत के बल्लेबाजों के लिए तेज व उछाल भरे विकेटों पर खेलना आसान नहीं

टीम इंडिया बड़े जोर-शोर से ऑस्ट्रेलिया दौरे (India vs Australia) पर गई थी. क्रिकेट के जानकारों ने भी टीम इंडिया के सीरीज जीतने की बातें कहकर टीम को हौसला दिया था. पहला टेस्ट जीतकर भारतीय खिलाडियों ने अपने हौसले को बुलंदी पर रखा. लेकिन चार टेस्ट मैचों की सीरीज के दूसरे टेस्ट में 146 रन की हार ने इस बात को और भी साबित कर दिया है कि हमारे बल्लेबाजों के लिए तेज व उछाल भरे विकेट पर बल्लेबाजी करना अब भी आसान नहीं है.

टीम इंडिया साल के आखिरी विदेशी दौरे पर इस समय ऑस्ट्रेलिया में है. जहां उसे चार टेस्ट मैच खेलने हैं. बॉल टेम्परिंग विवाद के बाद बदलाव के दौर से गुजर रही ऑस्ट्रेलियाई टीम को वर्तमान भ्रमणकारी भारतीय टीम से कमतर ही आंका जा रहा था. क्रिकेट पंडितों के साथ-साथ कई ऑस्ट्रेलियाई खिलाडियों ने भी इस भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुकाबले कमजोर माना है. अनुभव और प्रदर्शन के मामले में भी दोनों टीमों में बहुत अंतर है. ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने ऊपर लगी कालिख को साफ करने का प्रयास कर रही है और दूसरी और टीम इंडिया टेस्ट रैंकिंग में अपनी बादशाहत को बरकरार रखने के प्रयास में जुटी है. 

पहले मैच में तो अपेक्षा के कही अधिक बेहतर प्रदर्शन के आधार पर भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को रोमांचक मुकाबले में धूल चटा दी. लेकिन विश्व क्रिकेट में सबसे जुझारू टीम के तौर पर देखी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पर्थ के तेज विकेट पर भारतीय बल्लेबाजों की तेज व उछाल भरे विकेट पर परेशान होने वाली स्थिति से एक बार फिर उन्हें दो-चार करा दिया. यह एक जुझारू टीम का पलटवार था. जहां विश्व के दिग्गज विराट कोहली भी पहली पारी में शतक लगाने के बाद दूसरी पारी में भारतीय टीम की नैया पार न लगा सके. ऑस्ट्रेलियाई युवा व अनुभवी गेंदबाजों ने जिस प्रकार आक्रामक खेल दिखाया वह देखते ही बनाता था. 

विश्व क्रिकेट में हमेशा अपनी बल्लेबाजी व स्पिन गेंदबाजी के लिए विख्यात भारतीय खिलाड़ियों को पर्थ के विकेट पर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने नाकों चने चबवा दिए. ऑस्ट्रेलियाई में हमेशा तेज व उछाल भरे विकेट तेज गेंदबाजों को पसंद होते हैं. इस समय उनकी टीम को नाथन लॉयन जैसा गेंदबाज भी अपनी आक्रामक गेंदबाजी से सपोर्ट कर रहा है. दूसरे टेस्ट में नाथन लॉयन ने 8 भारतीय बल्लेबाजों को चलता किया. जहां एक ओर तेज गेंदबाज भारतीय खिलाडियों के लिए सिरदर्द बने हुए थे, उसमें ऑफ स्पिनर लॉयन ने भी अपना नाम जोड़ दिया. सीरीज में अभी तक 16  विकेट लेकर लॉयन ने भारतीय बल्लेबाजों को यह चुनौती दे दी है कि वे स्पिन खेलकर दिखाएं, जिसे खेलने के लिए भारतीय बल्लेबाज हमेशा ही माहिर माने जाते हैं.

दौरे से पूर्व टीम इंडिया ने तेज व उछाल भरे विकेटों पर खेलने के हिसाब से अपनी तैयारी की होगी. साथ ही स्पिनर लॉयन को खेलने के लिए भी बल्लेबाजी कोच ने जरूर ध्यान दिया होगा. किन्तु, अब भारतीय बल्लेबाजों पर दोनों ओर से यानि की तेज गेंदबाजी और स्पिन गेंदबाजी का आक्रमण हो गया है, जिससे टीम इंडिया को अभी तक जूझना पड़ा है. अगले दो टेस्ट मैचों के लिए सारी परिस्थितियां साफ हो गई हैं कि हमें किस क्षेत्र में अधिक मेहनत करनी होगी.

दूसरे टेस्ट की हार ने पहले टेस्ट की टीम इंडिया की जीत की खुशी को काफूर कर दिया होगा. कहां पहला टेस्ट जीतकर टीम इंडिया 70 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट सीरीज जीतने का सपना देखने लगी थी. किन्तु, ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट को 146 रन के अंतर से जीतकर टीम इंडिया के इतिहास बनाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. अभी तक टीम इंडिया 11 बार ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर गई है और केवल 3 बार ही सीरीज को बराबरी पर समाप्त कराने में कामयाब रही है. बाकी सीरीज के परिणाम ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में रहे हैं.

आखिरकार, एशिया से बाहर हमारे खिलाडी वो प्रदर्शन क्यों नहीं कर पाते, जिसके लिए वे विख्यात हैं. हर सुख सुविधा उनके लिए उपलब्ध है. भारत में क्रिकेट ही ऐसा खेल है जिसने देश में खेलों को नई दिशा दिखाई है. व्यवस्थित रूप से आयोजित किया जाने वाला यह खेल दूसरे खेलों के आंख की किरकिरी भी बनता रहा है. क्रिकेट खेल से जुड़े खिलाड़ी के सन्यास लेने पर जिस देश का प्रधानमंत्री उसे खेल की सेवा करने के लिए खिलाड़ी को बधाई दे, यह इस खेल की लोकप्रियता है.  

खेलप्रेमी चाहते हैं कि भारतीय टीम विदेशी दौरों पर भी जीत दर्ज करे. वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर अब दो टेस्ट और बाकी हैं. जिस प्रकार ऑस्ट्रेलिया ने पहले मैच में हार से उबरते हए वापसी की है, टीम इंडिया को भी ऐसा ही कुछ करना होगा. काम मुश्किल अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं. सब कुछ भारतीय बल्लेबाजों पर टिका है. उन्हें ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के चक्रव्यूह से निकलना होगा. अन्यथा, तेज व उछाल भरे विकेटों पर बल्लेबाजी न कर सकने की हमारी पुरानी कमजोरी इस दौरे पर भी बनी रहेगी.

(लेखक खेल समीक्षक व कमेंटेटर हैं)