कुदरत ने Reset बटन दबा दिया है!! तो आपकी खिड़की से क्या दिख रहा है?

हमें इस दौर से यह सबक लेना चाहिए कि हमें क्या नहीं करना है क्‍योंकि यदि हम प्रकृति को सांस लेने लायक बनाए रखेंगे तो खुद भी जीने लायक सांस ले पाएंगे.

कुदरत ने Reset बटन दबा दिया है!! तो आपकी खिड़की से क्या दिख रहा है?

जालंधर की छत से हिमाचल के पहाड़ देखे आपने? ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं लेकिन सिर्फ जालंधर ही नहीं, देश के 90 से ज्यादा शहरों की हवा इस वक्त अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बेहतरीन यानी जी भरकर सांस लेने लायक हैं.

कुदरत ने रीसेट बटन दबा दिया है!! 
तो आपकी खिड़की से क्या दिख रहा है? 

मैं इस वक्त नोएडा में मौजूद हूं और नोएडा की इस खिड़की से, सेक्टर 75 से लोटस टेंपल नजर आ रहा है. वही लोटस टेंपल जो नेहरू प्लेस में बना हुआ है. यहां से तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ यह मंदिर मेरी बालकनी से दिखता भी है, इससे पहले मुझे इस बात का एहसास भी नहीं था.

jalandhar

लॉकडाउन के महज 4 दिन के अंदर ही देश के कई शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 के आसपास आ गया था. 50 मतलब अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से शुद्ध सांस लेने लायक हवा.

आज आपके शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स हो सकता है कि 30 के आसपास हो जिसे बेहतरीन माना जाता है. यह सब कैसे हुआ है हमें सोचने की जरूरत है क्योंकि 21 दिन का लॉक डाउन जब खुल जाएगा तब हम फिर कुदरत का सर्वनाश कर रहे होंगे. हमें इस दौर से यह सबक लेना चाहिए कि हमें क्या नहीं करना है क्‍योंकि यदि हम प्रकृति को सांस लेने लायक बनाए रखेंगे तो खुद भी जीने लायक सांस ले पाएंगे.

कोरोना वायरस के काल में प्रकृति ने हमें बहुत से सबक दिए हैं:
पहला सबक- पैसे के बदले जीवन नहीं लिया जा सकता. दूसरा सबक- प्रकृति से बड़ा कुछ नहीं है. सबक यह भी है कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश नहीं है. सबक यह भी है कि यूरोपीय उतने भी समझदार नहीं जितना कि हम समझते थे. सबक यह भी है कि जानवर और पंछियों को कैद में कैसा लगता होगा, अब यह हम सीख चुके हैं. 

Yamuna river

आपदा से उपजे यह सबक हमें याद रखने चाहिए और साथ ही इन तस्वीरों को भी याद रखना चाहिए.

Yamuna

वैसे आपको बता दूं कि प्रदूषण का स्तर इस वक्त पूरे देश में 5 साल के बाद इतने नीचे के स्तर पर यानी इतने बेहतरीन लेवल पर है. पिछले साल मार्च के मुकाबले इस साल मार्च में दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में 70 फीसदी का सुधार हुआ है. आप बालकनी में खड़े होकर सांस लीजिए, खुद समझ जाएंगे. और हां, याद रखिएगा इस वक्त योद्धा वही है जो घर के अंदर बंद है क्योंकि यह युद्ध सरहद से नहीं, घर के अंदर बंद रहकर ही लड़ा जा सकता है.

(लेखिका: पूजा मक्कड़ Zee News की दिल्ली ब्यूरो चीफ हैं) 

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

Also Watch