JNU: सुल्फे से सुलगता...आगे बढ़ता एक आं...दोलन

कन्‍हैया कुमार ने कहा, 'भई दिल्ली पुलिस वालों…आज तक नजीब को नहीं ढूंढ़ पाए लेकिन जेएनयू के डस्टबीन मे फेंके गए कंडोम गिन लिए…

JNU: सुल्फे से सुलगता...आगे बढ़ता एक आं...दोलन

(नोट- सुल्‍फा का मतलब : गांजे की तरह चिलम में भरकर पी जाने वाली तंबाकू)

दोपहर के करीब 12 बज रहे थे. सेंट्रल दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में गहमागहमी हर बीतते पल के साथ बढ़ती जा रही थी. पहले पुलिस वालों की तैनाती फिर सुबह और दोपहर के बीच ट्रैफिक फ्लो का स्‍टॉप. क्रांतिवीरों का अब बसों से उतरकर सड़कों पर बल खाना शुरू हो गया था. अच्छा पहुंच तो गए आंदोलन के कर्रे मूड के साथ…लेकिन साथी क्रांतिकारी अभी दूसरी बसों में रास्ते में फंसे हैं...तो चलो गाइज तब तक गांजा, सुल्‍फा, सिगरेट का एक दौर हो जाए. क्‍यूं जी? ये देश के दिल में बसे जवाहर लाल विश्‍वविद्यालय के सिगरेट साधक क्रांतिकारी हैं. पिछले कुछ दिनों या यू कहें कि कुछ हफ्तों से नकाबपोशी वाली मारपीट का जो अड्डा बना हुआ है ये कैंपस...उसके विरोध में सिस्टम, सियासत और सरकार से सवाल पूछने और उसका जवाब चाहिए ही चाहिए वाले मूड में आए हैं एकदम…

बिल्कुल सही…लोकतंत्र… प्रजातंत्र… प्रश्न पूछने की स्वच्‍छंद स्वतंत्रता से ही तो इतने बड़े रूप में विद्मान है…लेकिन इस तंत्र में तर्क….सवालों की  संजीदगी...गप्पबाजी की भी गंभीरता का अपना एक स्तर है… अब क्लूलेस और कैजुअल सोच और अप्रोच से कैसे चलेगा आंदोलन…मतलब अब सुल्फा से सुलगता आंदोलन…मदमस्त नशे वाली हालत में प्रजातंत्र के तंत्र से सवाल का तत्काल और तपाक से जवाब चाहता ही है…बस…चाहिए तो चाहिए….

चलिए इस पर फिर लौटेंगे… पहले जरा एक चश्मदीद के तौर पर जो हो रहा था वहां वो बताते हैं…

बाकी बस भर के भी साथी क्रांतिवीर आ चुके थे. अब मंडी हाउस के एसेंबलिंग प्वाइंट पर विरोध मार्च शुरू हुआ…सिगरेट और चरस की कश से निकलते धुएं के बीच… और मार्च की मशाल किसके हाथ में थी…. हां वहीं महान महाक्रांतिवीर कन्हैया कुमार के हाथ में भई… जानते हैं न इनको…हां वही…. भारत तेरे टुकड़े होंगे…इंशाअल्लाह.. इंशाअल्लाह.. वाले…अब आज के अपने महान भाषण में अपने साथियों से खुद ही कहने लगे …हां हूं मैं टुकड़े टुकड़े गैंग का किंगपिन.. अब खुदे मान लिए तो.. ठीके है…

'छपाक' की रिलीज़ से पहले दीपिका पादुकोण का हृदय परिवर्तन क्‍यों हुआ?

खैर…मार्च में इस सबसे बड़े क्रांतिवीर के साथ देश की सियासी पार्टियों के कई नेता भी शामिल थे…लेकिन लीड रोल में एक पर ही है सारा भार…कन्हैया कुमार...बाकी ज्यादातर लेफ्ट टर्न वाले…भई लेफ्ट टर्न वाले इसलिए क्योंकि इनके स्टेरिंग के राइट की तरफ घूमने वाला एंगेल मैन्‍युफैक्‍चरिंग डिफेक्ट में लॉक होके ही आया है….

तो भई अपनी मस्ती में धुएं उड़ाता..आगे बढ़ता चौराहों पर…सड़कों पर रोके गए ट्रैफिक की लंबी कतारों में फंसे लोगों को अपना एटीट्यूड दिखाती क्रांतिवीरों की टोली मंडी हाउस.. कोपरनिकस मार्ग और दूसरे रास्तों से होते हुए शास्त्री भवन पहुंच गई..  

पुलिस का बैरिकड लगा था. आगे जाने की इजाजत नहीं थी. अधिकारियों ने कहा कि आपको अनुमति यहीं तक की है. 'छपाक' से…मेरा मतलब है तपाक से टोली वहीं बैठ गई.. गाना… बजाना.. नारा.. गांजा… सिगरेट….तो भई.. बैठ ही गए हैं तो  इन सबका एक दौर और सही… क्‍यूं है कि नहीं?

बड़े इंटरनेशनल ब्रांड की सारी चीजों से लैस इन लोगों के सामने एक-एक करके अब नेताओं के भाषण की बारी थी. अपने नफा नुकसान के हिसाब-किताब से कैलकुलेटेड भाषण देते एक-एक करके नेता आते गए...जाते गए… इसी दरम्‍यान जेएनयू की स्टूडेंट यूनियन की प्रेसीडेंट अपने एक डेलीगेशन के साथ एचआरडी मिनिस्ट्री के अंदर गईं.. अपनी मांगों के साथ…और तभी ट्रक पर बांधे गए बड़े लाउडस्पीकरों के बीच से एंट्री हुई गेस्ट इन स्पेशल अपियरेंस की… कन्हैया कुमार की...उनके भाषण की शुरुआत पर ध्यान दीजिएगा..

'भई दिल्ली पुलिस वालों…आज तक नजीब को नहीं ढूंढ़ पाए लेकिन जेएनयू के डस्टबीन मे फेंके गए कंडोम गिन लिए…भई...हमारे सिगरेट पीने से दिल्ली की हवा खराब नहीं हो रही है. भई… हम सब का बिआह काहे नहीं हो रहा है...'

देख रहे हैं न आंदोलन की गंभीरता और देश भर के छात्रों की ठेकेदारी अपने सर पर उठाए इस महाक्रांतिवीर के सवाल और इनके सुनने वाले इनकी बातों पर ताली पीटते... सुलफा सुलगाते… चरस का कस लगाते फूल मौज में हैं एक दम. अभी देश के इन जैसे बड़े मुद्दों और चुनौतियों पर रायशुमारी वाला एकालाप चल ही रहा था कि स्टूडेंट प्रेजीडेंट साहिबा आ गईं…उस लाउडस्पीकर वाले ट्रक पर चढ़ाईं गईं…और मैडम ने ऐलान कर दिया कि मंत्रालय तत्काल.. अभी तुरंत कोई फैसला नहीं ले रहा तो हम तो अभी तुरंत राष्ट्रपति भवन तक जायेंगे… चलिए आगे बढि़ए …

सारे वंचित शोषित क्रांतिकारी बैरीकेड की दूसरी तरफ से राजपथ की तरफ आगे बढ़ने लगे. पुलिस वालों ने ह्यूमन चेन बनाकर रोकने का प्रयास किया. अधिकारियों ने कहा कि आपको आगे जाने की अनुमति नहीं है. इसी प्वाइंट पर रुक जाइये आप लोग… लेकिन नशे की खुमारी, राय शुमारी की गुंजाइश कहां छोड़ती है भईया…दौड़कर…निकलकर…भागकर जाने की फिराक में लगे क्रांतिवीरों से पुलिस की झड़प…बहस.. और फिर नहीं ही मानने की सूरत में हिरासत में लेने की प्रक्रिया…

लेकिन इस उधम चौकड़ी ...भागमभाग के बीच अपने क्रांतिकारी भाषण से अभी थोडी देर पहले अपने सुलफा और सिगरेट में एकदम आग भर देने वाले चीफ गेस्ट इन स्पेशल अपियरेंस कन्हैया कुमार कहीं दिख नहीं रहे थे… ओह... चुपचाप निकल लिए थे वहां से…भई चीफ गेस्ट का गेस्ट अपियरेंस था...हवा भरे… बैलून फुलाए.. और जब पिन लग गया तो निकल लिए…. और क्या…और हां.... सुलफा से सुलगते आंदोलन का आज का टेक अवे मालूम क्या है ? …

कल फिर सुल्‍फा सुलगावेंगे…. कल फिर चरस चढ़ावेंगे...कल फिर बेफालतू के धमक जावेंगे…और हां …एक और टेक अवे… भारत तेरे टुकडे होंगे……इंशाअल्लाह... इंशाअल्लाह…...

(लेखक: अमित प्रकाश ज़ी न्यूज़ में असिस्‍टेंट एडिटर हैं)

(डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)