...चलो चाय के बाद आखिरकार 'पकौड़ा' भी सियासत के काम आया

यदि भारत में पकौड़ा इस वक्‍त सियासत का हॉट टॉपिक है तो इसी तर्ज पर पड़ोसी पाकिस्‍तान में समोसा भी चर्चा में रहा है.

...चलो चाय के बाद आखिरकार 'पकौड़ा' भी सियासत के काम आया
रामपुर में समाजवादी पार्टी ने पकौड़े बनाकर विरोध प्रदर्शन किया (फोटो-ANI)

देश में इस वक्‍त 'पकौड़ा' पॉलिटिक्‍स की हर तरफ चर्चा हो रही है. सत्‍ता पक्ष और विपक्ष इस पर नोकझोंक कर रहे हैं. कोई इसको रोजगार से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसके माध्‍यम से सत्‍ता पक्ष पर तंज कस रहा है. कई राजनेता तो ऐसे हैं जो सत्‍ता पक्ष का विरोध करने के लिए सड़कों पर पकौड़े तलते देखे गए हैं. जो भी हो, बेचारे पकौड़े को भी आखिरकार चाय पर चर्चा के बाद तवज्‍जो मिली. इसके भी दिन बहुरे और आखिरकार सियासत के काम आया. वैसे भी चाय के साथ पकौड़े या पकौड़ी का जबर्दस्‍त कांबीनेशन बनता है. इसका चाय पे चर्चा के बीच पीछे छूटना सियासत को भा नहीं रहा था. सो, इसको भी सियासी मेन्‍यू में शामिल कर कम से कम इसका भी मान रखने का काम किया गया है.

वैसे 'पकौड़ा' आम भारतीयों के लिए कोई एलीट डिश नहीं है. यह आम आदमी की तरह घिसी हुई रोजमर्रा की चीज है. जो तलने के बाद ही जानदार होता है. वैसे तो बचपन से ही लोग इसका स्‍वाद लेते आए हैं लेकिन मौजूदा परिप्रेक्ष्‍य में गूगलागमन करने पर पता चलता है कि यह व्‍यंजन खालिस तौर पर देसी है. इसकी पैदाइश भारतीय उपमहाद्वीप में हुई है. यानी कि भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और नेपाल जैसे मुल्‍कों की संस्‍कृति से इसका ऐतिहासिक नाता है. वैसे दक्षिण एशिया के अलावा यह ब्रिटेन में भी खासा मशहूर है. विशेष रूप से स्‍कॉटलैंड में इसके कद्रदान कुछ ज्‍यादा ही हैं. वहां फास्‍ट फूड स्‍नैक के रूप में यह काफी पसंद किया जाता है. हमारे प्रतिद्वंद्वी चीन में भी खाने की टेबल पर इसके चलन का जिक्र मिलता है.

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पकौड़ा और पकवान
पकौड़ा शब्‍द संस्‍कृत के 'पक्‍वावट' शब्‍द से आया है. यानी कि संस्‍कृत भाषा में इसको पकवान के आस-पास रखा गया है. इसकी महत्‍ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शादी-ब्‍याह के मौके पर वर-वधू पक्ष जब मिलते हैं तो चाय के साथ इसको खासतौर पर परोसा जाता है. इसलिए इसको हल्‍के में लेना किसी गुस्‍ताखी से कम नहीं है. महाराष्‍ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसको पकौड़े के बजाय 'बज्‍जी' के रूप में जाना जाता है. बंगाल में इसको 'पाकुड़ा' कहते हैं.

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जब समोसे पर हुई सियासत
यदि भारत में पकौड़ा इस वक्‍त सियासत का हॉट टॉपिक है तो इसी तर्ज पर पड़ोसी पाकिस्‍तान में समोसा भी चर्चा में रहा है. वर्ष 2009 में सिटी डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट लाहौर ने एक समोसा की कीमत छह रुपये तय की थी और इससे अधिक कीमत पर समोसा बेचने वाले दुकानदारों पर मजिस्ट्रेट जुर्माना कर रहे थे. पंजाब बेकर्स एंड स्वीट्स फेडरेशन ने इस फैसले को चुनौती दी लेकिन लाहौर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.

इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट लाहौर रजिस्ट्री में अपील की और तर्क दिया कि समोसा को पंजाब खाद्य पदार्थ (नियंत्रण) अधिनियम 1958 के तहत अधिसूचित नहीं किया गया है इसलिए इसकी कीमत को प्रांतीय सरकार तय नहीं कर सकती. पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि सरकार के पास अधिकार है कि वह उन पदार्थों की कीमत तय करे जिसे लोगों को बेचा जा रहा है. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि समोसे की कीमत 6 रुपये से ज्यादा हो सकती है.